Friday, 9 September 2016

अंधा घोड़ा


शहर के नजदीक बने एक फॉर्म हाउस में दो घोड़े रहते थे। दूर से देखने पर वो दोनों बिलकुल एक जैसे दिखते थे, पर पास जाने पर पता चलता था कि उनमे से एक घोड़ा अंधा है। पर अंधे होने के बाबजूद फॉर्म के मालिक ने उसे वहां से निकाला नहीं था बल्कि उसे और भी अधिक सुरक्षा और आराम के साथ रखा था।  अगर कोई थोडा और ध्यान देता तो उसे ये भी पता चलता कि मालिक ने दूसरे घोड़े के गले में एक घंटी बाँध रखी थी, जिसकी आवाज सुनकर अँधा घोडा उसके पास पहुंच जाता और उसके पीछे-पीछे बाड़े में घूमता। घंटी वाला घोडा भी अपने अंधे मित्र की परेशानी समझता, वह बीच-बीच में पीछे मुड़कर देखता और इस बात को सुनिश्चित करता कि कहीं वो रास्ते में भटक न जाए। वह यह भी सुनिश्चित करता कि उसका मित्र सुरक्षित वापस अपने स्थान पर पहुच जाए, और उसके बाद ही वो अपनी जगह की ओर बढ़ता।

  दोस्तों बाड़े के मालिक की तरह ही भगवान हमें बस इसलिए नहीं छोड़ देते कि हमारे अंदर कोई दोष या कमियां हैं। वो हमारा ख्याल रखते हैं और हमें जब भी जरुरत होती है तो किसी ना किसी को हमारी मदद के लिए भेज देते हैं। कभी-कभी हम वो अंधे घोड़े होते हैं, जो भगवान द्वारा बांधी गयी घंटी की मदद से अपनी परेशानियों से पार पाते हैं। तो कभी हम अपने गले में घंटी द्वारा दूसरों को रास्ता दिखाने के काम आते हैं।

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