Friday, 23 September 2016

ईमानदारी जरुरी



एक सेठ शहर में किसी बड़े जमींदार से मिलने के लिए आए। उनका मकसद जमींदार से जमीन का एक बड़ा सौदा करना था। ट्रेन से उतरकर उन्होंने रेलवे स्टेशन से जमींदार के घर तक के लिए टैक्सी कर ली। टैक्सी वाले ने उन्हें जमींदार के घर तक पहुंचा दिया। सेठ ने जमींदार को पैसे देने के लिए ब्रीफकेस ढूढ़ा तो ब्रीफकेस था ही नहीं। सेठ के चहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। तभी टैक्सी का चालक दरवाजे पर ब्रीफकेस लेकर आ गया। सेठ  की जान में जान आई। उसने टैक्सी चालक से पूछा- इसमें कई लाख रूपए थे। तुम्हारा मन नहीं डोला? टैक्सी चालक बोला-नहीं  , बेइमानी का मौका सबको मिलता है। मैंने इसे नहीं लिया। आज इसे रख लेता तो सभी टैक्सी वाले बदनाम हो जाते। यह नुकसान कही बड़ा होता। सेठ को उसकी यह बात छू गई।
 

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