Wednesday, 7 September 2016

कर्म से बनती हैं हाथ की रेखाएं


एक बालक को उसके पिताजी ने विद्या अध्यन के लिए गुरुकुल भेजा। बालक गुरुकुल में विद्या ग्रहण करने लगा। एक दिन गुरूजी ने बच्चे को एक पाठ याद करने के लिए दिया। परंतु बहुत कोशिशों के बाद भी उस बालक को पाठ याद नहीं हुआ।
  गुरूजी को बहुत गुस्सा आ गया और उन्होंने दंड देने के लिए छड़ी उठाई, तो बालक ने अपना हाथ गुरूजी के सामने कर दिया। गुरूजी ज्योतिष शास्त्र के प्रखर ज्ञाता थे। उन्होंने बच्चे का हाथ देखा, तो उनका सारा गुस्सा शांत हो गया और उन्होंने छड़ी एक तरफ रख दी।
  दंड न मिलने पर उस बालक ने जिज्ञासावश पूछा कि, गुरूजी आपने मुझे दंड क्यों नहीं दिया? इस पर गुरूजी बोले, बेटा तुम्हारे  हांथ में विद्या की रेखा नहीं है। विद्या की रेखा न होने के कारण ही तुम्हे पाठ याद नहीं हुआ। तुम आगे भी कभी विद्या प्राप्त नहीं कर सकोगे।
  यह सुनकर उस बालक ने एक नुकीला पत्थर उठाया और अपने हाथ पर एक रेखा खींच ली। यही बालक आगे चलकर संस्कृत के प्रख्यात विद्धवान पाणिनि के नाम से प्रसिद्ध हुआ। जिन्हें हम आज इतिहास पुरुष की संज्ञा देते हैं।


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