Friday, 23 September 2016

जीवन से मत भागो, जिओ उद्देश्य के लिए


घटना उन दिनों की है जब इंग्लैंड में डॉक्टर एनी बेसेंट अपने वर्तमान जीवन के प्रति निराश थीं और एक सार्थक जीवन जीने की ललक उनके ह्रदय में तीव्रता से उठी थी। एक दिन अँधेरी रात्रि सभी परिजन गहरी नींद में सोये हुए थे। केवल वही जाग रहीं थीं और आत्मशांति के लिए इतनी बैचेन हो उठीं कि इस जीवन से भाग जाने का ख्याल मन में लाकर सामने रखी जहर की शीशी लेने के लिए चुपके से उठीं, लेकिन तभी किसी दिव्य-शक्ति की आवाज ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया- क्यों, जीवन से दर गईं? सत्य की खोज करो।' यह सुनकर वह चोंक गईं,' अरे यह आवाज किसकी है? कौन मुझे भागने से रोक रहा है? उन्होंने उसी समय निश्चय कर लिया- सार्थक जीवन के लिए मुझे संघर्ष करना ही होगा।'

सत्य की खोज के लिए वे अपना परिवार, सुख-संपत्ति आदि सब कुछ छोड़कर भारत आ गईं। उन्होंने साध्वी जैसे जीवन यहाँ ग्रहण किया और विश्व को भारतीय जीवन-दर्शन के रंग देना ही अपना मुख्य उद्देश्य बना लिया। उनकी मृत्यु भारत में हुई थी।

निष्कर्ष:

अंधकार से प्रकाश की ओर जाने के लिए भी मनुष्य को संघर्ष करना पड़ता है, जिसके दौरान वह अपनी शुद्ध चेतना से समर्पण-भाव को जाग्रत कर जीवन-लक्ष्य की प्राप्ति कर लेता है। ऐसे संघर्षवान व्यक्त्ति की ईश्वर सहायता करता है, बशर्ते वह सच्ची लगन व उत्साह के साथ सार्थक जीवन के प्रति संकल्पकृत है और उसकी निगाह निर्धारित लक्ष्य पर केंद्रित हैं।

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