Tuesday, 13 September 2016

"बदलाव" स्वयं से करें शुरुआत।


जब मैं छोटा था तो आजाद था। मेरी कल्पना की कोई सीमा नहीं थी। तब मैं दुनिया को बदलने का सपना देखता था।

जब मैं थोड़ा बड़ा और समझदार हुआ, तो मैं समझ गया कि दुनिया नहीं बदलने वाली, इसलिए मैंने अपने लक्ष्य को थोड़ा छोटा कर लिया और सिर्फ अपने देश को बदलने का फैसला किया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

जब मैं बड़ा हो गया, तो मैंने हताशा में अंतिम कोशिश की, कि अपने परिवार को ही बदल लूं जो मेरे सबसे करीब हैं, लेकिन मेरे परिवार वाले भी बदलने को तैयार नहीं और अब, जब मैं मृत्युशैय्या पर लेटा हूं।

अचानक मुझे यह अहसास हुआ, अगर मैं सबसे पहले खुद को ही बदल लेता, तो मुझे देख कर मेरा परिवार भी बदल जाता।

हो सकता है उनकी प्रेरणा और प्रोत्साहन से देश को बेहतर बना पाता। कौन जाने मैं शायद दुनिया को बदल देता।

ऐसा हम सभी के जीवन मैं होता है। इस लिए बदलाव की शुरुआत पहले स्वयं से करें क्योंकि "हम बदलेंगे जग बदलेगा।"

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