Wednesday, 14 September 2016

अभियंता दिवस ( सर एम. विश्वेश्वरैया)


जन्म 15 सितंबर 1860अवसान 12 अप्रैल 1962शिक्षा 1883 में बीई (समकक्ष)सम्मान भारत रत्न
उपाधि सर एमवी


आज अभियंता दिवस (इंजीनियर्स डे) है। इंजीनियरिंग वह विज्ञान और व्यवसाय है, जो इंसानी जरूरतें पूरी करने में आने वाली बाधाओं का व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। यह परिभाषा सबसे पहले मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (सर एमवी) ने कारगर की। सर एमवी ने पूना कॉलेज टॉप किया तो उन्हें बिना इंटरव्यू के गवर्नमेंट ऑफ बॉम्बे ने सार्वजानिक विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर की नौकरी दे दी। उन्होंने देश की इंजीनियरिंग में क्रांति ला दी। उनके जन्म दिवस को अभियंता दिवस (इंजीनियर्स डे) के रूप में मनाया जाता है। एक समय की बात है। सर एमवी ट्रेन में जा रहे थे। उन्होंने ट्रेन की जंजीर खींच दी। ट्रेन रुक गई। सभी यात्री भला-बुरा कहने लगे। गार्ड भी आ गया और पूछा कि जंजीर किसने खींची? सर एमवी ने कहा- आगे रेल पटरी उखडी हुई है। गार्ड ने पूछा आपको कैसे पता? बोले ट्रेन की आवाज बदल गई है। बाद में लोग वहां पहुंचे तो वास्तव में रेल फ्रैक्चर था।

पैसे नहीं थे, सरकार ने पढ़ाया


सर एमवी ने प्रारंभिक शिक्षा जन्मस्थान कोलार (कर्नाटक) से पूरी की। फिर बेंगलुरु के सेंट्रल कॉलेज में प्रवेश लिया। पैसे नहीं थे, तो ट्यूशन पढ़ाया। 1881 में बीए में टॉप किया। फिर मैसूर सरकार की मदद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पूना के साइंस कॉलेज में दाखिला लिया।

पहला ऑटोमैटिक गेट बनाया


सर एमवी ने पानी निकालने का पहला ऑटोमैटिक फाटक बनाया। इसका इस्तेमाल मध्य प्रदेश के तिगरा डैम में किया गया। इसके लिए सरकार की और से उन्हें रॉयल्टी की राशि भेंट की गई, लेकिन विश्वेश्वरैया ने इसे लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने सरकार से कहा कि इस पैसे का इस्तेमाल अन्य विकास के प्रोजेक्ट्स में करें।

10 साल में सुधरा देश


विश्वेश्वरैया ने 1895 के बाद दस साल तक देश के विभिन्न हिस्सों में क्रांतिकारी काम किए। हैदराबाद का ड्रेनेज सिस्टम सुधारा। बॉम्बे में सिंचाई का ब्लॉक सिस्टम प्रस्तुत किया। बिहार और उड़ीसा में पानी की सप्लाई और रेल्वे के पुल निर्माण में मदद की। मैसूर में केआरएम डैम (उस वक्त एशिया का सबसे बड़ा डैम) बनाने में मदद की।

सौंपा मैसूर का 'सीएम' पद!


उनकी काबिलियत को देखते हुए 1908 में मैसूर का दीवान (मुख्यमंत्री पद) सौंप दिया गया और विकास कार्यों का पूरा उत्तरदायित्व उन्हें दे दिया गया। इसके बाद कृषि, सिंचाई, इंडस्ट्री, शिक्षा और बैंकिंग के क्षेत्र में उन्होंने नए कीर्तिमान रचे।

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