Saturday, 10 September 2016

अस्पताल के बाहर भी बच सकती हैं लाखों जिंदगियां ( Aspatal ke bahar bhi bach sakti hain lakhon jindgiyan )

आज दुनिया में फर्स्ट एड डे यानी प्राथमिक चिकित्सा दिवस मनाया जा रहा है। रेड क्रॉस सोसाइटी ने मुश्किल हालात में लोगों की जिंदगी बचाने की कोशिशों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इसकी शुरुआत की। इसके लिए सितंबर के दूसरे शनिवार का दिन मुकर्रर किया गया है।


एबीसी नियम


फर्स्ट एड का सबसे जरुरी नियम एबीसी है। मरीज को सहायता देने से पहले इसकी जानकारी होना बहुत जरुरी है।

A Airway

श्वासनली की जांच


बेहोशी में जीभ के कारण सांस नली रुकी हो सकती है। बेहोशी में मुंह की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं, इससे जीभ गले में अटक जाती है। अंगुलियों की मदद से जीभ खींचें। सुनिश्चित करें की सांस नली में कोई रुकाव ना हो

B Breathing

सांस की जांच


कान घायल के मुंह के पास ले जाकर सुने, देखें और महसूस करें। छाती देखें, ऊपर-नीचे हो रही है तो पीठ के बल सीधा लेटा कर मुंह से हवा दें। पता करें धड़कन है या नहीं।

C Circulation

खून प्रवाह की जांच


सांस ठीक होने पर खून की जांच करें। नाड़ी देखें। कैरोटिड आर्टरी ढूढ़ें। यह गर्दन के कोने में कान के नीचे होती है। अंगुलियों  की वहां रख कर जांच करें। दिल की धड़कन चल रही हो तो मुंह से सांस देना चालू रखें। धड़कन बंद हो तो बिना देरी कॉर्डियोपल्मोनरी रिसेसुटेशन (सीपीआर) करें। मुंह से सांस भी देते रहें। जब तक घायल खुद सांस नहीं लेता।

क्या करें ऐसे हालात में

दम घुटना :


पानी में डूबने से दम घुटे तो एबीसी नियम से सांस दें। गीले कपड़े उतार दें। फांसी लगाये व्यक्ति के नीचे के अंगों को पकड़कर तुरंत शरीर उठा दें, ताकि रस्सी का कसाव कम हो। उतारे मुंह से सांस दें। गला घुटने की हालत में पीठ पर स्कैपुला के बीच जोर से मुक्का मारें, फिर गले में उंगली डालकर निकालें।

सांप का काटना :


जहरीले सांप के काटने पर पेशेंट को आराम दें। शांति व आश्वासन दें। काटे स्थान को पानी में अच्छे से धोएं। काटे हुए स्थान को हमेशा दिल से नीचे रखें। काटे स्थान और आस-पास बर्फ पैक लगाएं ताकि जहर कम फैले। मरीज को सोने न दें। होश ना आने पर एबीसी नियम अपनाएं।

करंट लगना :


बिजली का श्रोत बंद करें। यह संभव न हो तो किसी सूखी लकड़ी, प्लास्टिक या कार्ड बोर्ड से बिजली के श्रोत से घायल को दूर कर दें। पीड़ित होश में न हो तो एबीसी रूल फॉलो करें। चोट पर बैंडेज लगाएं। जले स्थानों को साफ कपड़े से ढंक दें। जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।

हार्ट अटैक :


मरीज को चैन से लिटा दें। एस्प्रीन चूसने को दें। एस्प्रीन से एलर्जी हो तो न दें। तुरन्त एम्बुलेंस बुलाएं। दिल की धड़कन बंद होने लगे  तो सीने को दबाएं और सांस चालू करने की कोशिश करें। तकिया हटा दें और ठोड़ी पकड़ कर ऊपर उठा दें।

हड्डी टूटना :


पीड़ित बेहोश है, तो एबीसी नियम फॉलो करें। खून निकल रहा हो तो उसे रोकें। सदमें में है तो उसे सांत्वना दें। हड्डी सीधी कर नीचे एक गत्ते या लकड़ी का तख्ता देकर मजबूती से बैंडेज बांध दें। चोट की जगह पर प्लास्टिक बैग में बर्फ रखकर दबाएं। जल्द से जल्द मरीज को अस्पताल पहुंचाएं।

जलना :


फर्स्ट और सेकंड डिग्री बर्न में जली जगह को 5 मिनट पानी में डुबा कर ठंडा कीजिये। इससे सूजन और जलन कम होगी। एलोवेरा क्रीम या एंटीबायोटिक ओइन्टमेंट लगाएं। हल्के बैंडेज बांधें। दर्द कम करने बाली दवाएं दें। थर्ड डिग्री बर्न में जितनी जल्दी हो मरीज को अस्पताल ले जाएं। शरीर या कपड़ा ना छुएं।


ऐसी हो फर्स्ट एड किट


01.इमरजेंसी फोन नंबर
02.मुंह के लिए मास्क
03.चेहरे के लिए शील्ड
04.ब्लड प्रेशर कफ
05.स्टेथोस्कोप
06.स्पिरिट या अल्कोहल
07.रुई
08.आयोडीन लोशन
09.बैंडेज
10.हाइड्रोजन पेरोक्साइड
11.चिपकाने वाली पट्टियां
12.स्टिकलिंग प्लास्टर
13.ड्रेसिंग की सामग्री
14.टुनिकेट (खून रोकने के लिए)
15.साबुन
16.ठन्डे जेल पैक
17.कैंची


जरूरी दवाएं


01.दर्द दूर करने वाली दवाएं
02.दिल का दौर पड़ने पर आराम के लिए दवाइयां
03.कुछ एंटीबायोटिक ओइन्टमेंट
04.घाव साफ करने के लिए एंटीबैक्टिरियल लोशन
05.अस्थमा के रोगियों के लिए दवाएं
06.दस्त रोकने की दवा
07.उल्टी के लिए दवाएं

किसी घायल या बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाने से पहले उसकी जान बचाने के लिए हम जो कुछ भी कर सकते हैं उसे प्राथमिक चिकित्सा कहते हैं। आपातकाल में जान बचाने के लिए हम आसपास की चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इमरजेंसी में यह जानना ज्यादा जरुरी है कि क्या नहीं करना चाहिए? क्योंकि, गलत चिकित्सा से जान का खतरा है।

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