Thursday, 8 September 2016

मेरा अपना स्तर है, मैं निंदकों के स्तर तक क्यों जाऊं


रविन्द्रनाथ टैगौर विशिष्ट कवि थे। वे विचारक ही नहीं, शांत साधक भी थे। वे भयमुक्त थे। उनका स्वभाव बहुत शांत था। लेकिन निंदकों को कौन रोक सका है। कुछ लोग रविंद्रनाथ टैगौर जी की भी निंदा करते थे।   एक बार उनके मित्र शरदबाबू ने टेगौर से कहा, ' मुझ से यह आलोचना सही नहीं जाती। आप अपनी आधारहीन आलोचना का प्रतिकार करें।' टेगौर ने शांत भाव से कहा, ' तुम जानते हो, मैं निंदकों और आलोचकों के स्तर तक नहीं जा सकता। मेरा अपना स्तर है।  उसको छोड़कर मैं आलोचकों के स्तर तक जाऊं तभी उसका प्रतिकार हो सकता है, अन्यथा नहीं। मैं ऐसा कभी नहीं कर सकता।

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