जिका वायरस के लक्षण:
डेंगू, चिकनगुनिया और यलो फीवर जैसे लक्षण वाले जिका वायरस से पीड़ित व्यक्त्ति को बुखार आता है। स्किन में रेशेस होती है, कंजक्टिवाइटिस, मसल्स और ज्वाइंट पेन, बेचैनी और सिरदर्द होता है। दो से सात दिन तक इसका असर रहता है। जिका वायरस इन्फेक्टेड मच्छरों के काटने से होता है। एडीज मच्छर सामन्यतः दिन में काटते हैं।
उपचार व बचाव:
यह ऐसे क्रिटिकल रोग नहीं हैं जिसके लिए विशेष उपचार लेना पड़े। मरीज आराम करें, तरल पदार्थ खूब पिएं, बुखार और दर्द की सामान्य दवाएं लें। एक सप्ताह में आराम न हो तो विशेष उपचार करवाएं। मच्छरों के काटने से बचने के लिए शरीर को अधिकतम कवर करने वाले कपडे पहनें। दरवाजों और खिड़कियों पर विंडो स्क्रीन लगाकर रखें। मच्छरदानी में सोएं या इन्सेक्ट रिपेलेंट्स का इस्तेमाल करें। घर के आसपास बकेटस, ड्रम्स, गमलों और टायरों को साफ रखें। उनमें पानी इकट्ठा न होने दें। बूढ़े और बीमार लोग या ज्यादा यात्रा करने वाले मच्छरों से बचाव पर ज्यादा ध्यान दें। इस रोग में दवा के साथ बचाव के उपचार ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया है कि भारत में भी जिका वायरस पहुँच चूका है। यह एडिज मच्छरों से फैलने वाला फीवर है जो बंदरों से मनुष्य तक पहुंचा है। सन् 1947 में इस फ्लेवी वायरस को युगांडा के बंदरों में सबसे पहले पहचाना गया था। यह रोग वहां मनुष्यों को हुआ और अफ्रीका और अमरीका होते हुए एशिया तक फैल गया।


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