Friday, 28 October 2016

चुहिया का विवाह



एक बाज ने चुहिया को पंजे में जकड़ लिया। एक तपस्वी की उस पर नजर पड़ गयी। उन्हें चुहिया पर दया आ गई और उन्होंने अपने तप के प्रभाव से चुहिया को कन्या का रूप दे दिया। वह उसे साथ लेकर अपने आश्रम पर आ गए। तपस्वी की पत्नी ने पूछा तो तपस्वी ने उसे सारी बात बता दी। दोनों पुत्री की तरह कन्या का पालन-पोषण करने लगे। कुछ दिनों बाद कन्या युवती हो गई तो तपस्वी ने पत्नी से कहा, ' मैं इस कन्या का विवाह सूर्य से करना चाहता हूँ। तपस्वी ने सूर्य भगवान का आव्हान किया। परंतु लड़की ने कहा, ' इनका स्वभाव तो बहुत गरम है। जो इनसे उत्तम हो, उसे बुलाइए।' लड़की की बात सुन कर सूर्य ने बादल का सुझाव दिया। लड़की ने कहा, ' यह तो काले रंग का है। कोई इससे उत्तम वर हो तो बताइए।' तपस्वी ने फिर वायु देवता का आव्हान किया। वायु को देखकर लड़की ने कहा, ' वायु है तो शक्तिशाली, पर चंचल बहुत है। यदि कोई इससे अच्छा हो तो उसको बुलाइए।' अब बुलाए गए पर्वतराज। पर्वत के आने पर लड़की ने कहा, ' पर्वत तो बहुत कठोर है। किसी दूसरे वर की खोज कीजिए।' तपस्वी ने पर्वत से पूछा, ' पर्वतराज, तुम अपने से श्रेष्ठ किसे मानते हो?' पर्वत ने कहा, ' चूहे मुझसे भी श्रेष्ठ होते हैं। वे मेरे शरीर में भी छेद कर देते हैं।' तपस्वी ने चूहों के राजा को बुलाया और पुत्री से प्रश्न किया, ' क्या तुम इसे पसंद करती हो? लड़की चूहे को देखकर बड़ी प्रसन्न हुई और उससे विवाह करने को तैयार हो गई। वह बोली, ' पिताजी, आप मुझे फिर से चुहिया बना दीजिए। मैं इनसे विवाह करके आनन्दपूर्वक रह सकुंगी।' तपस्वी ने उसे फिर से चुहिया बना दिया।

No comments:

Post a Comment

सांपों के देश में एक ऐसा नेवला

सांपों के देश में एक ऐसा नेवला पैदा हो गया, जो सांप तो क्या, किसी भी जानवर से लड़ना नहीं चाहता था। सभी नेवलों में यह बात फैल गई। आखिरकार एक ...