Monday, 31 October 2016

लोहे को घुन खा गया!


एक बार की बात है दो व्यक्त्ति थे, जिनका नाम मामा और फूफा था। दोनों साथ में ही व्यापार करते थे। एक दिन मामा ने फूफा से कहा की क्यों न हम कोई ऐसी चीज खरीदें जिसको कुछ दिन रखने के बाद महंगे दामों में बेच दें, दोनों सहमत हो गए। फिर सोचा की ऐसा क्या सामान खरीदा जाए। तभी लोहा खरीदने पर दोनों सहमत हो गए। फिर सोचा की इसको रखे कहाँ। तभी मामा को याद आया की उसके पास एक कबाड़खाना है। वहीँ रख देते हैं, दोनों ने लोहे को वहीँ रख दिया।
कुछ दिनों तक तो सबकुछ ठीक रहा। कुछ समय बाद मामा ने बेईमानी से थोड़ा-थोडा लोहा बेचना चालू कर दिया। आखिर में कुछ भी लोहा नहीं बचा। एक दिन फूफा ने मामा से कहा की अभी लोहे क रेट ठीक है, क्यूं न हम कुछ लोहा बेंच दें। लेकिन मामा तो पहले ही पूरा लोहा बेच चूका था। उसने फूफा से कहा की लोहे में तो घुन लग गई है। फूफा को पूरा माजरा समझ में आ गया। उसने मामा से उस समय कुछ नहीं कहा और अपने घर चला गया। कुछ दिन बाद फूफा ने मामा से कहा की भाई में एक बहुत ही बड़ी शादी में जा रहा हूँ। क्यूं न तुम्हारे लड़के को भी साथ ले जाऊं, उसका भी घूमना हो जायेगा और मेरे को भी साथ मिल जाएगा। कल सुबह हम वापस आ जायेंगे। मामा ने कहा ठीक है, इसको ले जाओ और ठीक से खाना भी खिलवा देना। फूफा और लड़का शादी के लिए निकल गए। दो दिनों तक जब लड़का घर नहीं आया तो मामा को चिंता हुई। वह फूफा के घर गया और पूछा की मेरा लड़का कहाँ है। तभी फूफा ने कहा की लड़के को तो रास्ते में चील उठा ले गई। मामा ने कहा की भला चील कैसे बच्चे को उठा के ले जा सकती है। वह रोते-रोते राजा के पास पहुंचा, और आप बीती राजा को सुनाई। राजा ने फूफा से कहा की इसके लड़के को वापस क्यूं नहीं कर रहे। तो फूफा ने भी अपनी आप बीती सुनाई की लोहे को घुन कैसे खा सकता है। राजा ने पूरा माजरा समझ कर दोनों को आदेश दिया की फूफा लड़के को वापस करे और मामा,'फूफा के लोहे को।' इस तरह दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।

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