Saturday, 15 October 2016

जैक मा, संस्थापक - अलीबाबा डॉट कॉम


यह कहानी है एक ऐसे व्यक्ति की जिसने जीवन में आने वाली कठिनाइयों का डट कर सामना किया और कभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी। एक साधारण से टूरिस्ट गाइड की 800 रूपए की नौकरी से काम चालू किया और आज अरबों रुपए की संपत्ति का मालिक है। साथ ही चीन का सबसे अमीर सख्स भी है। यह सख्स है, ई-कॉमर्स कम्पनी "अलीबाबा डॉट कॉम" के संस्थापक "जैक मा" जो की अपने संघर्ष से ही सफल हुए।

"जैक मा" का जन्म 10 सितम्बर 1964 को हंग्जेहौ, चीन में हुआ था। उनके जन्म के समय चीन में साम्यवाद चरम पर था। वहां के लोगों का बाहरी दुनिया से कोई नाता नहीं था। परिवार को नेशनलिस्ट पार्टी का समर्थक होने के कारण कम्युनिस्ट पार्टी का काफी विरोध झेलना पड़ा। "जैक मा" शुरू से ही पढ़ाई में कमजोर थे। पारम्परिक शिक्षा से ज्यादा उनको जीवन के संघर्ष से सीखने को मिला। प्राथमिक शिक्षा के दौरान 2 बार तथा माध्यमिक शिक्षा के दौरान 3 बार असफल हुए।

शुरू से ही अंग्रेजी सीखना चाहते थे। इस वजह से स्कूल के दिनों से ही टूरिस्ट गाइड की नौकरी करने लगे। जिससे आमदनी के साथ-साथ अंग्रेजी भी सीख सकें।

स्कूल के बाद कॉलेज की शिक्षा के लीए आवेदन किया लेकिन प्रवेश परीक्षा में तीन बार असफल हो गए। उन्होंने हॉवर्ड विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए लगभग दस बार आवेदन किया लेकिन असफल हो गए। आखिरकार उन्हें हंग्जेहौ के "टीचर इंस्टिट्यूट" में दाखिला मिल गया जहाँ से उन्होंने अंग्रेजी भाषा में सन् 1988 में स्नातक किया।

गणित में भी "जैक मा" कमजोर थे। एक बार उन्हें गणित में 100 में से 1 अंक प्राप्त हुआ था।

"जैक मा" ने कहा था कि, मैं गणित में कमजोर हूँ, मैनेजमेंट की पढ़ाई कभी की नहीं। और एकाउंट्स रिपोर्ट को पड़ना नहीं जनता।

कॉलेज के बाद उन्होंने 30 से अधिक कम्पनियों में आवेदन किया, परंतु नौकरी नहीं मिली। पुलिस की नौकरी के लिए भी आवेदन किया परन्तु वहां से भी निराशा हाँथ लगी। फिर केएफसी में भी आवेदन किया जहाँ 24 लोगों ने आवेदन किया था, जिसमे से 23 चयनित हो गए। सिर्फ एक "जैक मा" ही असफल हुए। आखिरकार एक टीचर की नौकरी मिल ही गई। कुछ समय बाद अनुवादक(ट्रांसलेटर) की नौकरी मिल गई। जिसकी वजह से अमरीका जाने का मौका मिला। जहाँ 1995 में इंटरनेट से रूबरू हुए।

इंटरनेट की जानकारी हाँसिल कर उन्होंने एक वेबसाइट 'चाइनापेज' बनाई। निवेश के लिए उन्होंने सरकारी निकाय से साझेदारी की परन्तु सरकारी नौकरशाही ने धीरे-धीरे उनकी योजना को साकार नहीं होने दिया। आखिरकार उन्होंने सरकारी निकाय की साझेदारी से अलग होना ही उचित समझा। आखिरकार निवेश की कमी और अन्य कई कारणों से उनको यह परियोजना बंद करनी पड़ी।

"चाइनापेज" की असफलता के बाद "जैक मा" ने एक नई परियोजना पर काम किया, उन्होंने एक ऐसी वेबसाइट बनाने का निर्णय किया जो की सभी तरह के व्यवसायीयों को एक पोर्टल प्रदान करे। एवं जहाँ सभी व्यवसायी अपने व्यवसाय की विस्तृत जानकारी पूरी दुनिया के साथ साझा कर सकें। इस तरह उन्होंने "अलीबाबा डॉट कॉम" नाम से वेबसाइट की शुरुआत की।

शुरू में निवेश जुटाने के लिए उन्होंने सिलिकॉन वैली का रुख किया। परन्तु वहां से निराशा ही हाँथ लगी। यहाँ तक की सिलिकॉन वैली के कुछ लोगों ने उनके इस बिज़नेस को घाटे वाला और असफल करार दिया।

हार न मानते हुए, "जैक मा" अपने प्रयास में लगे रहे और आखिर वह समय भी आ गया जब उनको दो बड़ी कम्पनियों "गोल्डमैन सैक्स" और "सॉफ्ट बैंक" ने 25 मिलियन डॉलर का निवेश किया।

इसके बाद भी "अलीबाबा डॉट कॉम" को फायदा न होता हुआ देखकर "जैक मा" ने अपनी टीम के साथ मिलकर "ताओबाओ डॉट कॉम" नाम से एक नीलामी की वेबसाइट बनाई। जिसका उदेश्य सामानों की नीलामी निशुल्क करना था। यह वेबसाइट "जैक मा" ने "ई बे"(e Bay)जैसी बड़ी ई कॉमर्स कंपनी को पछाड़ने के लिए बनाई थी। 

जिसका की पहले से ही चीन के नीलामी बाजार पर प्रभुत्व था। परन्तु निशुल्क सेवा के कारण "ताओबाओ" पर आर्थिक दवाब पड़ने लगा। जिससे निपटने के लिए "जैक मा" और उनकी टीम ने वेल्यु एडेड सेवाओं की शुरुआत की जैसे की कस्टम वेबपेज। पांच वर्षों के अंदर ही "ई बे"(e Bay) को चीन के बाजार से अपने हाँथ खीचने पड़े। उसके बाद "जैक मा" की कंपनी ने कई उतार-चढ़ाव देखे। एक समय ऐसा भी आया जब कंपनी दिवालिया होने से बस 18 महीने दूर थी। पर "जैक मा" के बेमिशाल नेतृत्व, दूरदर्शिता और दृढ़संकल्प की बदौलत "अलीबाबा डॉट कॉम" न सिर्फ मुसीबत से उबर पाई बल्कि सफलता के नए शिखर पर जा पहुंची। 2013 में 10 लाख करोड़ रुपए के आईपीओ के साथ यूएस मार्केट की सबसे बड़ी आईपीओ वाली कंपनी बन गई। "जैक मा" की खुद की संपत्ति 23 बिलयन डॉलर से भी ज्यादा आंकी गई है।

यह सब "जैक मा" की काबिलियत और कभी न हार मानने की जिद की बजह से ही संभव हुआ।

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