Monday, 17 October 2016

शराब ने पकड़ रखा है


एक शराब का व्यसनी व्यक्ति एक संत के पास गया और उनसे शराब छोड़ने का उपाय पूछा, उसने कहा शराब की वजह से मेरा परिवार बहुत परेशान है। बच्चे भूख से विलख रहे हैं, घर की सुख-शांति चली गई। परिवार बर्बाद हो गया है। यह सब सुन कर संत ने कहा, जब शराब से तुमको इतना नुकसान है तो इसको छोड़ क्यों नहीं देते। व्यक्ति ने कहा कि मैं तो इसको छोड़ना चाहता हूँ, पर यह मेरे खून में इस कदर समां गई है कि मुझ को छोड़ने का नाम ही नहीं लेती।

संत ने मुस्कुरा कर कहा अच्छा तो ये बात है, तुम कल आओ मैं कल कुछ प्रयास करता हूँ।

अगले दिन व्यक्ति संत के पास पहुंचा। उसने देखा की संत एक खंभे को कसकर पकड़े हुए हैं। कुछ देर तक तो वह व्यक्ति मौन खड़ा हो कर देखता रहा। परन्तु जब उससे नहीं रहा गया तो उसने संत से कहा आप इस खंभे को छोड़ क्यों नहीं देते। संत ने कहा कि मैं पूरी कोशिश कर रहा हूँ, पर ये खंभा मुझको छोड़ ही नहीं रहा, इसने मेरे शरीर को कस के पकड़ रखा है। व्यक्ति ने कहा भला ऐसा भी हो सकता है क्या, ये निर्जीव खंभा आपको कैसे पकड़ सकता है। व्यक्ति ने कहा मैं शराबी जरूर हूँ पर मूर्ख नहीं। यह सुन कर संत ने खंभा छोड़ कर कहा, यही मैं तुम को समझाना चाह रहा हूँ। भला निर्जीव शराब की बोतल तुम को कैसे नहीं छोड़ रही है। यह तो तुम भी जानते हो कि अगर मन में दृढ़निश्चय कर लिया जाए तो कुछ भी कार्य असंभव नहीं। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। शरीर की हर क्रिया मन के द्वारा नियंत्रित होती है, और मन में जैसी इक्छाशक्ति होती है, वैसा ही कार्य सफल होता है। अतः शराब ने तुम को नहीं पकड़ा है बल्कि शराब को तुमने पकड़ रखा है। तुम अगर आज मन में दृढनिश्चय कर लो तो आज से ही शराब छोड़ सकते हो। व्यक्ति संत की बातों से प्रभावित हो गया। और उसी दिन उसने भविष्य में शराब न पीने का निर्णय लिया। कुछ दिन पश्चात ही उसके परिवार में खुशियाँ वापस लौट आईं।

इसी तरह ऐसा कोई भी व्यसन नहीं है, जिसको एक बार करने के बाद न छोड़ा जा सके। अगर मन में दृढ़निश्चय हो तो बड़ी से बड़ी बुराई का त्याग किया जा सकता है।

No comments:

Post a Comment

सांपों के देश में एक ऐसा नेवला

सांपों के देश में एक ऐसा नेवला पैदा हो गया, जो सांप तो क्या, किसी भी जानवर से लड़ना नहीं चाहता था। सभी नेवलों में यह बात फैल गई। आखिरकार एक ...