Tuesday, 25 October 2016

द्रष्टीकोण


एक बार एक व्यक्त्ति अपने 28 वर्षीय पुत्र के साथ ट्रेन में सफर कर रहा था। अचानक से पुत्र जोर से चिल्ला कर बोला, पापा वो देखो पेड़ पीछे की तरफ भाग रहे हैं। पिता मुस्कुराया और पास मे ही एक अन्य व्यक्त्ति था। उसको आश्चार्य हुआ की इतना बड़ा लड़का कैसी बातें कर रहा है। तभी थोड़ी देर बाद पुत्र फिर उत्सुकता से बोला वो देखो पापा बादल उड़ रहे हैं। अब उस व्यक्त्ति से रहा नहीं गया। दूसरे व्यक्त्ति ने पिता से कहा इसे किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाइए। तभी पिता ने उस व्यक्त्ति से कहा कि आप गलत समझ रहे हैं। दरअसल बात यह है कि इसने आज ही देखना शुरू किया है। यह बचपन से अँधा था। आज ही इलाज के बाद इसकी आँखे यह सब देख पा रही हैं।

तभी साथ में बैठे व्यक्त्ति को अपने बोलने पर थोड़ा अफसोस हुआ। और वो भी उस लड़के के साथ नए द्रष्टीकोण से देखने लगा।
कभी-कभी हम भी बिना सोचे-समझे इस तरह बर्ताव कर बैठते हैं। सभी का जीवन अलग-अलग परिस्थियों से गुजरता है। जरुरी नहीं है, हम जो सोचते हैं वही सही हो।

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