एक बार की बात है, एक गोरैया का जोड़ा एक पेड़ पर निवास करता था। रोज की तरह नर गोरैया खाने के इंतजाम के लिए आस-पास ही गया हुआ था और गोरैया अण्डों की देखभाल कर रही थी। तभी पास के जंगल से एक गुस्सैल हांथी मदमस्त अवस्था में जंगल के पेड़ों को ध्वस्त करते हुए आगे बढ़ा चला जा रहा था। हांथी गोरैया चिड़िया के घोंसले वाले पेड़ के समीप पहुँच कर,उस पेड़ को गिराने की कोशिश करने लगा। गोरैया ने उससे बहुत विनती की परंतु उस हांथी ने एक न सुनी। परंतु पेड़ बहुत मजबूत था। कई बार प्रयास करने के बाद भी पेड़ टुटा तो नहीं परंतु पेड़ हिलने से गोरैया के अण्डे घोंसले से नीचे गिर कर फूट गए। गोरैया ने बहुत विलाप किया। हांथी आगे बढ़ चला, तभी कटफुड़वा वहां से निकला। वह गोरैया का मित्र था। उसने पूरी व्यथा सुनी और हांथी को सबक सिखाने की ठानी। उसने अपने अन्य मित्र जो की मधुमक्खी और मेंढक थे,को भी साथ ले लिया। सभी ने एकत्रित हो कर योजना बनाई। हांथी के समीप पहुँच कर मधुमक्खी ने उसके कान के समीप आवाज करना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर हांथी मधुमक्खी को भगाने के लिए क्रोध में अपनी गर्दन इधर-उधर करने लगा, जिससे उसका ध्यान बंट गया। तभी कटफुड़वा ने मौका देख कर अपनी चोच से हांथी की दोनों ऑंखें फोड़ दी। हांथी दर्द से कराहने लगा और उसको दिखाई देना बंद हो गया। वह इधर-उधर भागने लगा। तभी मेंढक ने एक खाई में पहुँच कर टर्र-टर्र की आवाज निकालनी शुरू कर दी। हांथी को लगा पास में ही कोई तालाब है। और वो उसी दिशा में बढ़ते हुए एक पहाड़ी की ऊंचाई पर पहुँच गया।वहां से वह खाई में नीचे गिर गया और उसका अंत हुआ। इस तरह योजनाबद्ध तरीके से सभी ने मिल कर हांथी को सबक सिखाया। इस कहानी का तात्पर्य यही है,कि छोटे-छोटे लोग मिल कर बड़े काम को अंजाम दे सकते हैं। किसी को छोटा और कमजोर नहीं समझना चाहिए।
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