नवरात्री प्रारंभ हो गई हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव को सम्पूर्ण भारतवर्ष में बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। प्रत्येक शहर, प्रत्येक गांव एवं प्रत्येक घरों में उत्साह का माहौल होता है। क्या दिन क्या रात सब एक से ही लगते हैं। जगमगाती माता की प्रतिमाएं, पंडाल, और झांकिया। पूरा बाजार जैसे रौशनी से सरोबार हो। सभी और खुशियाँ ही खुशियाँ, भंडारे और संगीत से सुसज्जित वातावरण। नवरात्रि एक प्रमुख हिंदू पर्व है, एवं संस्कृत भाषा से उदृत है। जिसका तात्पर्य है 'नौ रातें"। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति/देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवां दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि की नौ रातों में तीन देवियों महालक्ष्मी, सरस्वती एवं दुर्गा माता के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। दुर्गा का मतलब जीवन से दुखों को हटाने वाली होता है।
नौ देवियाँ हैं:-
◆शैलपुत्री :-
इसका अर्थ पहाड़ों की पुत्री होता है। माँ दुर्गा का प्रथम रूप है, शैलपुत्री। पर्वतराज हिमालय के यहाँ जन्म लेने के कारण इनको शैलपुत्री कहा जाता है। नवरात्री की प्रथम तिथि को इनकी ही पूजा की जाती है। इनके पूजन मात्र से भक्त सदा धन-धान्य से परिपूर्ण रहते हैं।
◆ब्रह्मचारिणी :-
यह माँ दुर्गा का दूसरा रूप है। माँ दुर्गा का यह रूप साधकों तथा भक्तों को अनंत कोटि फल प्रदान करने वाला है। इनकी उपासना से वैराग्य, तप, त्याग, सदाचार, और संयम की भावना जागृत होती है।
◆चंद्रघंटा :-
यह माँ का तीसरा रूप है। जिसका अर्थ है, चाँद की तरह चमकने वाली। इनकी उपासना तृतीय को की जाती है। इनकी उपासना से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। वीरता के गुणों में वृद्धि होती है। स्वर में दिव्य अलौकिक माधुर्य का समावेश होता है तथा आकर्षण बढ़ता है।
◆कूष्माण्डा :-
यह माँ का चौथा रूप है, जिसका तात्पर्य पूरा जगत उनके पैरों में है। इनकी उपासना से सिद्धियों, निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु व यश में वृद्धि होती है।
◆स्कंदमाता :-
यह माँ का पांचवा रूप है, अर्थ है "कार्तिक स्वामी की माता"। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता सुखदायी हैं। माँ अपने भक्तों की समस्त इक्षाओं की पूर्ति करती हैं
◆कात्यायनी :-
ये माता काल का नाश करने वाली हैं, यही इनके नाम का तात्पर्य है। छठवें दिन इनकी पूजा होती है। इनकी पूजा से अद्भुत शक्ति का संचार होता है। माँ साधकों को दुश्मनों का संहार करने में सक्षम बनाती हैं।
◆कालरात्रि :-
माता का यह रूप काल का नाश करने वाला है। सप्तमी में इनकी पूजा की जाती है। इनकी उपासना से सभी पापों का नाश होता है, शत्रु पराजित होते हैं। तेज बढ़ता है।
◆महागौरी :-
अष्टमी में इनकी उपासना की जाती है। इनकी उपासना से सुख-शांति में वृद्धि होती है। समस्त पापों का क्षय होता है। शत्रु परास्त होते हैं।
◆सिद्धिदात्री :-
माँ सर्व सिद्धि देने वाली हैं, इनकी उपासना नवमीं को की जाती है। समस्त कष्टों का हरण करती हैं। कन्या पूजन इसी दिन किया जाता है। जिसमे सम्मान पूर्वक उनको घर आमंत्रित कर भोजन एवं उपहार प्रदान किये जाते हैं।
सर्वप्रथम श्री रामचंद्र जी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था। उसके पश्चात दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। नवरात्रि भारत में विभिन्न भागों में अलग-अलग ढंग से मनाई जाती है। गुजरात में नवरात्रि पर्व में डांडिया और गरबा का आयोजन किया जाता है। जो की अब संपूर्ण भारत में प्रचलित हो गया है। पश्चिम बंगाल में बंगालियों के मुख्य त्यौहार में दुर्गा पूजा सबसे प्रमुख त्यौहार है।










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