Sunday, 23 October 2016

क्या सचमुच घर में कैंसर उगा रहे हैं हम?



वास्तव में कैंसर क्या है? एक सूक्ष्मतम कोशिका का असामान्य व्यवहार। ये किसी भी कारण से हो सकता है लेकिन कुछ कारण हम स्वयं पैदा करते हैं। कैंसर से डरते तो सब हैं लेकिन उसके होने के कारणों या सोर्स को नजरअंदाज करते हैं। रोजमर्रा के जीवन में हम दर्जनों केमिकल्स और आर्टिफिशियल चीजों का उपयोग करते हैं जो कहीं न कहीं कैंसर का कारण बन सकती है।

कैन पैक्ड वस्तुएं:


कैन में विसफिनल नामक प्लास्टिक की परत है। प्लास्टिक में मौजूद बीपीए हार्मोंस के असंतुलन से ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर की सम्भावना बढ़ जाती है। बीपीए से बाँझपन और पॉली सिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हो सकता है।

फल-सब्जी:


गंदे नालों के पानी से सब्जी-फल पैदा किए जा रहे हैं। अच्छी पैदावार के लिए इन्सेक्टीसाइड्स, पेस्टिसाइड्स और केमिकल फर्टिलाइजर्स का अत्यधिक इस्तेमाल हो रहा है। डीडीटीए नाइट्रेट और फास्फेट खेतों में डाला जा रहा है। ये सब कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।

नॉन स्टिक बर्तन:


इन बर्तनों की कोटिंग से कम तेल से खाना अवश्य पक जाता है पर यह कोटिंग पॉली टेट्राफ्लूरोएथिलीन से की जाती है। एनवायरोमेंट वर्किंग ग्रुप के अनुसार नॉन स्टिक बर्तनों से निकलने वाला धुंआ गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदेह है और रोग प्रतिरोधक क्षमता घटाता है।

डिटर्जेंट और कीड़े-मकौड़े की दवा:


इनमें अल्काइन फिनॉल, ट्राईक्लोसन और टेट्राफ्लूरोएथिलीन रसायन हैं। ये हार्मोन और एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करते हैं और हार्मोन का संतुलन बिगाड़ देते हैं। इस रसायनों से ब्रेस्ट और प्रोटेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

सौंदर्य प्रसाधन:


पावडर, बॉडी लोशन, लिपस्टिक, डियोड्रेंट और स्प्रे आदि ट्राईक्लोसन, पराबेन्स जैसे रसायनों से बनते हैं जो हार्मोंस को प्रभावित कर कैंसर की सम्भावना बढ़ाते हैं।

माइक्रोवेव:


माइक्रोवेव से पका या गर्म किया गया खाना लंबे समय तक खाने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है हालाँकि इस तथ्य पर शोध हो रहा है।

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