एक बार एक व्यक्त्ति अपने मित्र के साथ जंगल के रास्ते पास के गांव की और जा रहा था। शाम होने को थी, तभी उसको कुत्ते के भौकने की आवाज आई। कुत्ता शिकारी के जाल में फंसा हुआ था। व्यक्त्ति ने सोचा की इसको जाल से आजाद कर दिया जाए। वह जाल के पास जैसे ही पहुंचा। कुत्ता और जोर-जोर से घुर्राने और भौंकने लगा। उसके मित्र ने मना किया रहने दो इसको इसके हाल पे ही छोड़ दो नहीं तो ये काट लेगा। फिर भी व्यक्त्ति ने कोशिश करके कुत्ते को आजाद कर दिया। व्यक्त्ति के हाँथ में थोडा सा घाव भी हो गया था। फिर दोनों गांव की और चल दिए। कुछ दिनों के बाद व्यक्त्ति का पुनः जंगल में से गुजरना हुआ। इस बार वह अकेला ही था। तभी पीछे से अचानक दो व्यक्त्ति आए और उसको घेर लिया। वो दोनों डांकु थे,उन्होंने धक्का दे कर उस व्यक्त्ति से कहा कि जो कुछ भी कीमती सामान है हमारे हवाले कर दो। तभी कुत्ता आसपास ही था, आवाज सुन कर व्यक्त्ति को पहचान लिया। कुत्ता दोनों डांकुओं पर टूट पड़ा और उनको बुरी तरह जख्मी कर दिया। दोनों डांकु जान बचा कर भाग खड़े हुए। व्यक्त्ति ने कुत्ते को दुलार किया और दोनों खुशी-खुशी अपने-अपने रास्ते चल दिए। इस तरह निस्वार्थ सेवा भाव ने व्यक्त्ति को डांकुओं से बचाया।
निस्वार्थ की गई सेवा या मदद् ही इंसान को सही मायने में इंसान बनाती है। जानवर भी इंसान से निस्वार्थ प्रेम करते हैं।

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