Saturday, 1 October 2016

जीवन में कंकड़, पत्थर और रेत का महत्व



दर्शनशास्त्र  के एक व्याख्याता ने कक्षा में कुछ चीजें साथ में लेकर प्रवेश किया। व्याख्यान के शुरू होते ही उन्होंने बड़ा शीशे का जार लिया और उसमें पत्थर के बड़े-बड़े टुकड़े डालने लगे। फिर उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या जार भर गया है?

सभी ने सहमति में सर हिला दिया की "हाँ" भर गया है।

तब व्याख्याता ने छोटे-छोटे कंकडों से भरा एक डिब्बा लिया और छोटे कंकडों को जार में भरने लगे। जार को थोडा हिलाने से कंकड़ पत्थरों के बीच में व्यवस्थित हो गए। 

फिर व्याख्याता ने बात को दोहराया कि, अब जार सचमुच भर गया है, क्या?
पुनः सभी ने उत्तर में हाँ कहा।

व्याख्याता ने एक रेत से भरा हुआ पात्र उठाया और जार में रेत भरने लगे। रेत ने धीरे-धीरे जार में जगह बना ली? 

व्याख्याता ने पुनः पूछा क्या अब जार भर गया है। सभी छात्रों ने एक बार फिर हाँ में सर हिला दिया।
व्याख्याता ने छात्रों से कहा कि में आप लोगों को यही समझाना चाहता हूँ। जार आपकी जिंदगी को प्रदर्शित करता है, बड़े-बड़े पत्थर आपके जीवन की जरुरी चीजें हैं, आपका परिवार माता-पिता, भाई-बहन, आपका जीवन साथी, आपके बच्चे, आपकी सेहत, ऐसी चीजें कि अगर आपकी बाकी सारी चीजें खो भी जाएँ और सिर्फ ये ही बस रहें तो भी आपकी जिंदगी पूर्ण रहेगी।

ये कंकड़ कुछ अन्य चीजें हैं, जो आपकी नौकरी, आपका घर इत्यादि।

और रेत बाकी सभी छोटी-मोटी चीजों को दर्शाती हैं।

अगर आप जार को पहले रेत से भर देंगे तो कंकड़ और पत्थरों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।

यही आपकी जिंदगी के साथ होता है। अगर आप अपना सारा समय और ऊर्जा छोटी-छोटी चीजों में लगा देंगे तो आपके पास कभी उन चीजों के लिए समय नहीं होगा जो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।


उन चीजों पर ध्यान दीजिए जो आपकी खुशी के लिए जरुरी है। बच्चों के साथ खेलिए, घर के लोगों को समय दीजिये। लोगों से मिलिए, अपनी प्राथमिकता तय कीजिए। 

काम के लिए, घर के लिए आपके पास समय होगा।

बाकी चीजें बस रेत हैं।

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