Wednesday, 2 November 2016

सूर्य पर ध्यान दो!


एक राजा की कथा है, जिसने अपने तीन दरबारियों को एक ही अपराध की तीन प्रकार से सजा दी। पहले को कुछ समय के लिए कारावास दिया, दूसरे को देश निकाला और तीसरे से कहा मुझे आश्चर्य है, मुझे तुमसे इस कार्य की अपेक्षा नहीं थी।
तीनों को अलग -अलग सजा मिली और तीनों दुखी थे। पर तीनों के दुःख का कारण भी अलग-अलग था। पहला और दूसरा व्यक्ति दूसरों के समक्ष अपमानित महसूस कर रहे थे और तीसरा स्वयं के समक्ष। पहला व्यक्ति कारागृह में ही आनंद से रहने लगा और जेल में ही उसने मित्र बना लिए। दूसरा व्यक्ति दूसरे देश में व्यापार करने लगा और वही बहुत बड़ा व्यापारी बन गया। तीसरा व्यक्ति क्या करता? उसका पश्चाताप गहरा था क्यों की  स्वयं के समक्ष था। उससे शुभ की अपेक्षा की गई थी। यह बात उसे कांटे की तरह चुभ रही थी और यही उसको ऊपर की और उठा रही थी। जिस बात की उससे अपेक्षा की गई थी वह उसकी चाह से भर गया। शुभ या अशुभ, शुभ के जन्म का प्रारंभ है। सत्य पर विश्वास उसके अंकुरण के लिए वर्षा है और सौन्दर्य पर निष्ठा। सोये सौन्दर्य को जगाने के लिए सूर्योदय है। अशुभ एक दुर्घटना है और उसे देख कर मनुष्य स्वयं के समक्ष अपमानित भी महसूस करता है। सूर्य बदलियों के पीछे छुपजाने से स्वयं बदली नहीं हो जाता। बदलियों पर विश्वास न करें। किसी भी स्थिति में न करें। सूर्य पर विश्वास हो तो उसके उदय में शीघ्रता होती है।

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