Tuesday, 22 November 2016

दूसरों के लिए


एक राजा ने किसी वृद्ध को एक छोटा सा पौधा लगाते देखा। राजा ने उससे पूछा तो वृद्ध ने कहा, 'यह अखरोट का पौधा है।' राजा ने हिसाब लगाया कि उसके बड़े होने और उस पर फल आने में कितना समय लगेगा। फिर बोला, 'सुनो बाबा, इस पौधे के बड़े होने और उस पर फल आने में कई साल लग जाएंगे। तब तक तुम तो रहोगे नहीं।' वृद्ध राजा के मन के विचार को ताड़ गया। उसने राजा से कहा, 'हां, यह बात सही है कि फल आने तक मैं रहूं या न रहूं। लेकिन यह भी सोचिए कि इस बूढ़े ने दूसरों की मेहनत का कितना फायदा उठाया है? दूसरों के लगाए पेड़ों के कितने फल अपनी जिंदगी में खाए हैं। मैं क्या, आप भी आज जो फल खा रहे हैं, उसके पौधे बहुत पहले कभी किसी ने लगाए ही होंगे। क्या मुझे इस भावना से पेड़ नहीं लगाने चाहिए कि उनके फल दूसरे लोग खा सकें?' वृद्ध के विचार जान राजा उसके सामने नतमस्तक हो गया।

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