Wednesday, 23 November 2016

बुरे वक्त में भगवान

एक भक्त था। वह भगवान को बहुत मानता था, बड़े प्रेम और भाव से उनकी सेवा किया करता था। एक दिन भगवान से कहने लगा, ' मैं आपकी इतनी भक्ति करता हूं पर आज तक मुझे आपकी अनुभूति नहीं हुई। मैं चाहता हूं कि आप भले ही मुझे दर्शन न दें पर ऐसा कुछ कीजिए कि मुझे ये अनुभव हो की आप हो।' भगवान ने कहा, ठीक है। तुम रोज सुबह समुद्र के किनारे सैर पर जाते हो। जब तुम रेत पर चलोगे तो तुम्हे दो पैरों की जगह चार पैर दिखाई देंगे। दो तुम्हारे पैर होंगे और दो पैरों के निशान मेरे होंगे। इस तरह तुम्हे मेरी अनुभूति होगी।' अगले दिन वह सैर पर गया। जब वह रेत पर चलने लगा तो उसे अपने पैरों के साथ-साथ दो पैर और भी दिखाई दिए। वह बड़ा खुश हुआ। अब रोज ऐसा होने लगा। एक बार उसे व्यापार में घाटा हुआ। उसके अपनों ने भी उसका साथ छोड़ दिया। अब वह सैर पर गया तो उसे चार पैरों के जगह दो पैर दिखाई दिए। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि बुरे वक्त में भगवान ने साथ छोड़ दिया। धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा। फिर सब लोग उसके पास वापस आने लगे। एक दिन जब वह सैर पर गया तो उसने देखा कि चार पैर वापस दिखाई देने लगे हैं। उससे अब रहा नहीं गया। वह बोला, 'भगवान् जब मेरा बुरा वक्त था तो सब ने मेरा साथ छोड़ दिया था पर मुझे इस बात का गम नहीं था क्योंकि इस दुनिया में ऐसा ही होता है पर आपने भी उस समय मेरा साथ छोड़ दिया था। ऐसा क्यों किया?'

भगवान् ने कहा, 'तुमने यह कैसे सोच लिया कि मैं तुम्हारा साथ छोड़ दूंगा। बुरे वक्त में रेत पर तुमने दो पैर के निशान देखे, वे मेरे पैरों के थे। उस समय में तुम्हें गोद में उठाकर चलता था और आज जब तुम्हारा बुरा वक्त ख़त्म हो गया तो मैंने तुम्हे नीचे उतार दिया है।'

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