🔻लघुकथा🔻
एक 6 वर्षका लडका अपनी 4 वर्ष की छोटी बहन के साथ लहान बाजार से जा रहा था।
अचानक से उसे लगा की,उसकी बहन पिछे रह गयी है।
वह रुका, पिछे मुडकर देखा तो जाना कि, उसकी बहन एक खिलौने के दुकानके सामने खडी कोई चिज निहार रही है।
लडका पिछे आता है और बहनसे पुछता है, "कुछ चाहिये तुम्हे ?" लडकी एक गुडीया की तरफ उंगली उठाकर दिखाती है।
बच्चा उसका हाथ पकडता है, एक जिम्मेदार बडे भाई की तरह अपनी बहन को वह गुडीया देता है। बहन बहुत खुश हो गयी है।
दुकानदार यह सब देख रहा था, बच्चे का प्रगल्भ व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित भी हुआ ....
अब वह बच्चा बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदारसे पुछा, "सर, कितनी किमत है इस गुडीया की ?"
दुकानदार एक शांत व्यक्ती है, उसने जीवन के कई उतार देखे होते है। उन्होने बडे प्यार और अपनत्वसे बच्चे पुछा, "बताओ बेटे, आप क्या दे सकते हो?"
बच्चा अपनी जेब से वो सारी सीपें बाहर निकालकर दुकानदार को देता है जो उसने थोडी देर पहले बहनके साथ समुंदर किनारे से चुन चुन कर लायी थी।
दुकानदार वो सब लेकर युं गिनता है जैसे पैसे गिन रहा हो।
सीपें ( शिंपले ) गिनकर वो बच्चेकी तरफ देखने लगा तो बच्चा बोला,"सर कुछ कम है क्या?"
दुकानदार :-" नही नही, ये तो इस गुडीयाकी किमतसे ज्यादा है, ज्यादा मै वापीस देता हूं" यह कहकर उसने 4 सीपें रख ली और बाकी की बच्चे को वापिस दे दी।
बच्चा बडी खुशीसे वो सीपें जेबमे रखकर बहनको साथ लेकर चला गया।
यह सब उस दुकान का कामगार देख रहा था, उसने आश्चर्यसे मालिकसे पुछा, " मालिक ! इतनी महंगी गुडीया आपने केवल 4 सिपों के बदले मे दे दी ?"
दुकानदार एक स्मित हास्य करते हुये बोला,
"हमारे लिये ये केवल सीप है पर उस 6साल के बच्चे के लिये अतिशय मौल्यवान है। और अब इस उम्रमे वो नही जानता की पैसे क्या होते है ?
पर जब वह बडा होगा ना...
और जब उसे याद आयेगा कि उसने सिपोंके बदले बहन को गुडीया खरीदकर दी थी, तब ऊसे मेरी याद जरुर आयेगी, वह सोचेगा कि,,,,,,
"यह विश्व अच्छे मनुष्यों से भरा हुआ है।"
यही बात उसके अंदर सकारात्मक दृष्टीकोन बढानेमे मदद करेगी और वो भी अच्छा इंन्सान बनने के लिये प्रेरीत होगा।
Great post sir
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