बात बहुत पुरानी है, एक राजा ने मुख्य मार्ग पर बीचों-बीच एक बड़ा पत्थर रखवा दिया। वह एक पेड़ के पीछे छिपकर यह देखने लगा कि कोई उस पत्थर को हटाता है या नहीं। कई राजदरबारी और व्यापारी वहां से गुजरे और उनमें से कई ने ऊंचे स्वर में राजा की इस बात के लिए निंदा की कि राज्य की सड़क व्यवस्था ठीक नहीं थी लेकिन किसी ने भी उस पत्थर को स्वयं हटाने का कोई प्रयास नहीं किया। फिर वहां से एक किसान गुजरा, जिसकी पीठ पर अनाज का बोरा लदा हुआ था। पत्थर के पास पहुंचने उसने अपना बोझा एक और रख दिया और पत्थर को हटाने का प्रयास करने लगा। बहुत कठोर परिश्रम करने के बाद वह उसे हटाने में सफल हो गया। किसान को उस जगह पर बटुआ रखा दिखा। बटुए में सोने के सिक्के थे और राजा का लिखा हुआ एक पत्र था। पत्र में लिखा था कि सोने के सिक्के पत्थर हटाने वाले के लिए उपहारस्वरूप थे। उस किसान ने इससे वह सबक सीखा, जो हममें से बहुत कम ही समझ पाते हैं, 'हमारे मार्ग में आने वाली हर बाधा हमें उन्नति करने का अवसर प्रदान करती है।'
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सांपों के देश में एक ऐसा नेवला
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