Tuesday, 13 December 2016

पोशाक

सुंदरता और भद्दापन एक दिन सागर किनारे मिल गए। आपस में बोले, 'चलो नहाते हैं।' उन्होंने कपड़े उतारे और  पानी में उतार गए। कुछ देर बाद भद्दापन किनारे पर आया। उसने सुंदरता के कपडे पहने और चला गया। सुंदरता भी सागर से बहार आयी। उसे अपने कपड़े नहीं मिले। अपने नंगेपन पर उसे शर्म आने लगी। इसलिए उसने भद्दापन के कपड़े उठाए और पहनकर अपने रास्ते चली गयी। उसी दिन से लोग दूसरे जैसा दिखने की गलती करते हैं।

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