रोटी और भूख एक महात्मा जी शाम के वक्त टहलने निकले तो एक निर्धन को जंगल में इधर-उधर कुछ खोजते हुए देखकर पूछा।'बाबा क्या खोज रहे हो?'निर्धन बड़े ही करुण शब्दों में बोला-कुछ खाने योग्य फल-फूल मिल जाए तो पेट की आग बुझाऊँ। कुछ आगे जाने पर महात्मा जी को एक सेठजी कुछ खोजते हुए मिले।उत्सुकता से उन्होंने पूछा, सेठजी, इस जंगल में क्या खोज रहे हो?सेठजी ने कहा,'वैद्य द्वारा बताई गई औषधि की पत्तियां खोज रहा हूँ ताकि मुझे भूख लग सके क्योंकि मुझे कई दिनों से भूख नहीं लग रही है। महात्मा जी ने आकाश की ओर हाथ उठाकर कहा-यह क्या है प्रभु? गरीब रोटी ढूंढता है और अमीर भूख। आज आवश्यकता इस बात की है कि जन-जन में सहयोग,अपनत्व एवं मदद की भावनाओं का संचार किया जाये।
Thursday, 25 August 2016
रोटी और भूख !
रोटी और भूख एक महात्मा जी शाम के वक्त टहलने निकले तो एक निर्धन को जंगल में इधर-उधर कुछ खोजते हुए देखकर पूछा।'बाबा क्या खोज रहे हो?'निर्धन बड़े ही करुण शब्दों में बोला-कुछ खाने योग्य फल-फूल मिल जाए तो पेट की आग बुझाऊँ। कुछ आगे जाने पर महात्मा जी को एक सेठजी कुछ खोजते हुए मिले।उत्सुकता से उन्होंने पूछा, सेठजी, इस जंगल में क्या खोज रहे हो?सेठजी ने कहा,'वैद्य द्वारा बताई गई औषधि की पत्तियां खोज रहा हूँ ताकि मुझे भूख लग सके क्योंकि मुझे कई दिनों से भूख नहीं लग रही है। महात्मा जी ने आकाश की ओर हाथ उठाकर कहा-यह क्या है प्रभु? गरीब रोटी ढूंढता है और अमीर भूख। आज आवश्यकता इस बात की है कि जन-जन में सहयोग,अपनत्व एवं मदद की भावनाओं का संचार किया जाये।
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