अमरिकी यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर ने एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित किया है, जो मूक-बधिरों की जुबान बन सकेगा। यह कंप्यूटर प्रोग्राम, बोले जाने वाले वाक्यों का अनुमान लगा सकने में सक्षम है।
हालाँकि यह अनुमान पर आधारित है, इसलिए इसकी सटिकता पर कुछ संदेह भी है लेकिन रिसर्चरों का दावा है कि यह काफी हद तक सटीक होगा। यह प्रोग्राम लिप-रीडिंग कर अनुमान नहीं लगाता, बल्कि वह दिमाग की गतिविधियों को पढ़ कर अनुमान लगाता है। इस तकनीकी पर रिसर्च करने वाले अमरीकी यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर के रिसर्चर डॉक्टर एंडू एंडरसन का कहना है कि यह तकनीकी उन लोगों के लिए कारगर होगी जो दिमाग में लगी चोट की वजह से बोल नहीं सकते। यह प्रोग्राम रिसर्च में शामिल लोगों के बोले जाने वाले वाक्यों का बहुत हद तक अंदाज़ा लगाने में सफल हुआ है।

No comments:
Post a Comment