Tuesday, 30 August 2016

सातवीं भी पास नहीं एमआईटी में दाखिला

17 साल की मालविका राज जोशी को प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) ने एडमिशन दिया है। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग को पसंद करने वाली मालविका की कहानी बेहद दिलचस्प है। उन्होंने पढ़ाई के बने-बनाए ढांचे को तोड़कर अपना सपना पूरा करने का अलग और बेहद कठिन रास्ता चुना था। वे सफल रहीं और इसकी वजह है उनकी माँ।

चार साल पहले छोड़ा स्कूल
करीब चार साल पहले मालविका मुम्बई के दादर इलाके में स्थित पारसी युथ असेंबली स्कूल में पढाई करती थीं। वे सातवीं कक्षा में थी और स्कूल में उन्हें एक अच्छी छात्रा माना जाता था। इस बीच माँ सुप्रिया ने मालविका को स्कूल न भेजने का फैसला किया। मालविका ने माँ के फैसले का सम्मान करते हुए पढ़ाई बंद कर दी। सुप्रिया सर्टिफिकेट से ज्यादा ज्ञान को महत्वपूर्ण मानती हैं।
घर पर ही की पढ़ाई
कंप्यूटर प्रोग्रामिंग मालविका का पसंदीदा विषय है। स्कूल छोड़ने के बाद उन्होंने घर पर ही पढ़ाई शुरू की और इंटरनेट व किताबों की मदद से अपने ज्ञान का दायरा बढ़ाना शुरू किया। वे कई विषय पढ़ा रही थीं। प्रोग्रामिंग भी उनमें से एक था। उन्हें यह अच्छा लगा और बाकी विषयों के मुकाबले इसे ज्यादा समय देना शुरू कर दिया। इस बीच साइंस ओलंपियाड में हिस्सेदारी की और इन्फॉर्मेटिक्स ओलंपियाड में तीन मैडल जीते। इनमें दो रजत और एक कांस्य पदक शामिल थे। इन्हीं की बदौलत एमआईटी ने बैचलर ऑफ साइंस के लिए स्कॉलरशिप मिली है।
अलग रास्ता चुनने में यकीन
मालविका की माँ ने उन्हें स्कूल से निकालकर एक कठोर फैसला लिया था और मालविका खुद भी लीक से हटकर रास्ता चुनने में यकीन रखती हैं। कड़े नियमों के कारण एमआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में एडमिशन के लिए कम से कम 12 वीं पास होना जरुरी होता है। तब मालविका ने दूसरा रास्ता चुना और उन्होंने इंटरनेशनल ओलंपियाड में हिस्सेदारी शुरू की।
सीधे एडमिशन का प्रावधान
एमआईटी में विभिन्न ओलंपियाड (गणित, भौतिकी या कंप्यूटर) में मैडल जीतने वाले छात्रों को सीधे एडमिशन देने का प्रावधान है। मालविका को ओलंपियाड में मैडल की बदौलत अपने पसंदीदा विषय में एमआईटी में दाखिला मिला है।

कितना जानते हैं आप अपनी हड्डियों के बारे में


हमारी हड्डियों के बारे में कई ऐसी बातें हैं जो बेहद दिलचस्प और जानकारीपरक हैं। आइए जानें कुछ खास बातें-
हमारी हड्डियां क्यों घट जाती हैं?
जन्म के समय शरीर में 300 हड्डियां होती हैं लेकिन मृत्यु के समय बचती हैं 206, इसकी वजह कई हड्डियां जैसे खोपड़ी आदि की हड्डियां जुड़कर एक इकाई बन जाना है।
हमारी बढ़त रूकती कैसे है?
हड्डियां ग्रोथ प्लेट के रूप में वयस्क होने तक बढ़ती हैं। लड़कों में टीनएज और लड़कियों में पीरियड शुरू होने के दो साल के अंदर बंद हो जाती है।
हड्डियों को कैसे खुश रखें?
हड्डियों का घनत्व 30 की उम्र तक बढ़ता है। इसके बाद व्यायाम न करने, केल्शियम की कमी से डेंसिटी कम होती जाती है।
कैसे जुड़ती हैं टूटी हड्डियां?
हड्डियों की क्षतिग्रस्त हुई सतह के तंतु आपस में जुड़कर खुद को सिल लेते हैं और एक नई हड्डी बन जाते हैं।
कंकाल है कमाल
ये हमें सहारा देकर सक्षम बनाता है। दिमाग, दिल और फेफड़े को सुरक्षा देता है। रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है और उन सभी मिनरल्स को सुरक्षित और नियमित करता है जो शरीर तंत्र के लिए जरुरी होते हैं।
सबसे ज्यादा हड्डियां
हमारे हाँथ, उँगलियों और कलाई में सबसे ज्यादा 54 हड्डियां होती हैं जो हमें लिखने, कुछ पकड़ने और हर तरह का काम करने में मदद करती हैं।
सबसे बड़ी और छोटी हड्डी
हमारी जांघ की 19 इंच लम्बी फीमर नाम की हड्डी शरीर में सबसे बड़ी होती है। इसके उलट कान में घुंडी नुमा स्टेपीज नाम की 0.11 इंच की हड्डी सबसे छोटी होती है। हड्डियों की मजबूती के लिए पर्याप्त मात्रा में केल्शियम और विटामिन डी का सेवन करें।
हड्डियां जीवित टिश्यू हैं
हड्डियों में मौजूद कोलेजन टिश्यूज़ खुद को हमेशा जीवंत और प्रगतिशील बनाए रखते हैं। ये कहना गलत न होगा कि ये इतनी तेज़ी से बढ़ते हैं कि हमारे आने वाले सात साल में हमें एक नया कंकाल मिल सकता है।
क्या हमारे दांत भी हड्डियां हैं?
नहीं, उन्हें हड्डियां नहीं कहा जा सकता क्यूंकि उनमें हड्डियों की तरह केल्शियम और मिनरल्स तो होता है पर कोलेजन टिश्यू नहीं होते जिससे उनमें लचीलापन नहीं होता।
महिलाओं-पुरूषों की हड्डियों में अंतर
लगभग समान होती हैं लेकिन एंगल और शेप का फर्क सिर्फ पेट के नीचे उदर क्षेत्र की पेल्विस हड्डियों में होता है।
कुछ हड्डियां कभी नहीं घूमती
कुछ हड्डियां जॉइंट्स के करीब सिमट जाती हैं। कुछ तेज़ी से घूमती हैं जबकि कुछ बिल्कुल नहीं घूमती। जैसे कि हमारी खोपड़ी में क्रेनियम।
कुछ जॉइंट्स चतखते क्यों हैं?
मसल्स और लिगामेंटस हमारे जॉइंट्स को सपोर्ट देते हैं और कार्टिलेज उन्हें कुशन प्रदान करते हैं। जब कार्टिलेज घिस जाते हैं तो आर्थराइटिस के कारण जोड़ चटख जाते हैं।
आपके अंदर है एक 'फनी बोन'
दिलचस्प है कि यह एक हड्डी नहीं बल्कि कोहनी में मौजूद एक नर्व होती है और जब कभी गलती या लापरवाही से ये किसी चीज़ से टकरा जाती है एक मजेदार सी झन्नाहट या दर्द होता है।

Monday, 29 August 2016

The Moon is slowly moving away


For the last few billion years The Moon's gravity has been raising tides in Earth's oceans witch the fast spinning Earth attempts to drag ahead of the sluggishly orbiting Moon. It is moving away at a tiny, although measurable distance from the Earth every year. Do the math and you will clearly see that 85 million years ago it was orbiting the earth at a distance of about 35 feet from the earth's surface.

Baba Ramdev to set up a University

After having conquered the world of FMCG with his wide range of patanjali products, Yoga guru turned entrepreneur Swami Ramdev has now set his sights on the field of private education. As per reports, Ramdev plans to establish a world-class university in India within the next five years to educate around one lakh students in different streams in the country.

सबने माना हॉकी के 'जादूगर' का लोहा


हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यान चंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को हुआ था। वे अपने समय के श्रेष्ठ हॉकी खिलाडी थे। भारत ने उनके समय में लगातार तीन ओलंपिक 1928,1932 व 1936 में हॉकी में स्वर्ण पदक जीते। उस समय भारत हॉकी में सबसे मजबूत देश माना जाता था। मेजर ध्यान चंद ने अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच 1948 में खेला था। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय कॅरियर में 400 से अधिक गोल किए। उनका जन्मदिन राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। हॉकी में योगदान के लिए 1956 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

Sunday, 28 August 2016

कंप्यूटर बनेगा न बोलने वालों की जुबान


अमरिकी यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर ने एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित किया है, जो मूक-बधिरों की जुबान बन सकेगा। यह कंप्यूटर प्रोग्राम, बोले जाने वाले वाक्यों का अनुमान लगा सकने में सक्षम है।
   हालाँकि यह अनुमान पर आधारित है, इसलिए इसकी सटिकता पर कुछ संदेह भी है लेकिन रिसर्चरों का दावा है कि यह काफी हद तक सटीक होगा। यह प्रोग्राम लिप-रीडिंग कर अनुमान नहीं लगाता, बल्कि वह दिमाग की गतिविधियों को पढ़ कर अनुमान लगाता है। इस तकनीकी पर रिसर्च करने वाले अमरीकी यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर के रिसर्चर डॉक्टर एंडू एंडरसन का कहना है कि यह तकनीकी उन लोगों के लिए कारगर होगी जो दिमाग में लगी चोट की वजह से बोल नहीं सकते। यह प्रोग्राम रिसर्च में शामिल लोगों के बोले जाने वाले वाक्यों का बहुत हद तक अंदाज़ा लगाने में सफल हुआ है।

दिव्यांग छात्रों के लिए पोस्ट मेट्रिक स्कॉलरशिप


भारत सरकार के केंद्रीय सामाजिक कल्याण एवं अधिकारिता मंत्रालय की तरफ से दिव्यांग छात्रों को दी जाती है। इसके लिए दसवीं कक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक अर्जित करना अनिवार्य है। स्कॉलरशिप के तहत भिन्न भिन्न कोर्सेज के लिए प्रति माह निश्चित धन राशि दी जाती है।
इसके लिए शारीरिक रूप से 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांग छात्र आवेदन कर सकते हैं। साथ ही आवेदक की आमदनी ढाई लाख रुपये प्रतिवर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
विस्तृत जानकारी के लिए वेबसाइट देख सकते हैँ।
http://scholarships.gov.in/

ऑनलाइन कोर्स...


जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी से करें वेब डेवलपर कोर्स
आज कंपनी से लेकर आम आदमी तक अपना एक वेब पेज रखता है। इस वजह से वेब डेवलपर की मांग हमेशा बनी रहती है। इसलिए वेब डवलपर बनना आपके लिए एक अच्छा कदम साबित हो सकता है। कोई जरुरी नहीं कि एक सॉफ्टवेयर इंजीनयर ही वेब डवलपर होगा। आज बहुत सारे इंस्टिट्यूट और यूनिवर्सिटीज़ ऐसी हैं जो इस तरह के सर्टिफिकेट कोर्सेज ऑनलाइन चलाते हैं, वह भी मुफ़्त में। हाँ, अगर सर्टिफिकेट लेना हो तभी कुछ फीस चुकानी होती है। अगर आप प्रतिष्ठित जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी से वेब डवलपर का कोर्स करना चाहते हैं तो आप अभी वहाँ एनरोल करा सकते हैं। इस कोर्स में आधुनिक वेब पेज के लिए एचटीएमएल, सीएसएस और जावा स्क्रिप्ट की कोडिंग के बारे में बताया जायेगा। यह सर्टिफिकेट कोर्स मात्र पांच सप्ताह का है और आपको मात्र चार से छह घंटे निकालने होंगे। विस्तृत जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएं:
www.coursera.org/learn/html-css-javascriptfor-web-developers#syllabus

अपने रास्ते खुद चुनिए


भीड़ हमेशा उसी रास्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता है, पर इसका मतलब ये नहीं की भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है। अपने रास्ते खुद चुनिए क्यों की आपसे बेहतर आपको कोई नहीं जानता।

इन्हें नहीं चाहिए भारी बस्तों वाला स्कूल


नए प्रतिमान
दुनिया की सबसे महँगी कारों में से एक टेस्ला बनाने वाली कंपनी  'टेस्ला मोटर्स' के मालिक और अरबपति एलोन मस्क ने अपने 5 बच्चों के लिए अमरीका के किसी प्रसिद्ध स्कूल को नहीं चुना, बल्कि खुद एक स्कूल शुरू कर दिया है। इस स्कूल की खास बात है की यहाँ कोई फैल नहीं होता....
दुनिया भर में  लोग अपने बच्चों को अमरीकी स्कूलों और यूनिवर्सिटी में पढ़ाने और वहां तक पहुँचाने का सपना देखते हैं। लेकिन 'स्पेस-एक्स' और 'टेस्ला मोटर्स' के सीईओ और प्रसिद्ध बिजनेसमैन एलोन मस्क ने अपने पांच बेटों को पढ़ाने के लिए अमरीकी स्कूलों को सिरे से ख़ारिज कर दिया और खुद ही अपने बच्चों के लिए एक अनोखा स्कूल खोल दिया है।
            
                     अरबपति बिजनेसमैन मस्क के इस स्कूल में उनके पांच बेटों के अलावा उनकी ही कंपनी के कर्मचारियों के कुछ और बच्चे हैं और पिछले साल सितंम्बर तक इस स्कूल  में सिर्फ 20 बच्चे पढ़ रहे हैं। पारंपरिक अमरीकी स्कूलों से अलग  हटकर टेस्ला मोटर्स के मालिक के इस स्कूल में न तो ग्रेड सिस्टम लागु है और न ही बच्चों पर सब कुछ एक साथ पढ़ने का बोझ। यहाँ बच्चे बस सीखते हैं।
एलोन मस्क अमरीकी स्पेस एजेंसी नासा के बिज़नेस पार्टनर हैं, जो अंतरिक्ष में बने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर उपकरण और अन्य वस्तुएं पहुँचाते हैं।
इस स्कूल में ग्रेड लेवल नहीं हैं, जिससे भविष्य में यहाँ पढ़ने वाले बच्चों में कोई भेद नहीं होगा। यह ज्यादा तार्किक होगा की हम किसी बच्चे को उसकी क्षमताओं और उसकी रुचियों के आधार पर शिक्षा दें। सामान्य स्कूली शिक्षा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि मुझे पारंपरिक स्कूलों में सबसे बड़ी समस्या यह लगती है कि वह बच्चों को किसी मसले का हल करना या उससे निपटना नहीं सिखाते हैं।

Saturday, 27 August 2016

कार के एसी से निकलने वाली बेंजीन गैस है खतरनाक


एक शोध के अनुसार कार स्टार्ट करने के साथ एसी ऑन कर देना नुकसानदायक है। कार का डेशबोर्ड,सीट जैसी कई वस्तुएं प्लास्टिक या फाइबर से बनती हैं। जब कार के शीशे बंद हो और एसी चलाएं तो इनसे रंगहीन या हल्के पीले रंग की बेंजीन नामक गैस निकलती है। इस गैस के कण कार में फ़ैल जाते हैं और साँस के जरिये हमारे शारीर में पहुच जाते हैं। बेंजीन के कारण ऑक्सिजन की कमी हो जाती है। बेंजीन से ज्यादा देर संपर्क में रहने के कारण थकान, चक्कर आना, दिल की धड़कन बढ़ जाना और सिरदर्द जैसी परेशानी हो सकती है। निष्कर्ष पर विवाद भी है। ब्रिटेन के एन एच एस ने इस नुकसान को भ्रम बताया है।
कैंसर का भी है कारण
बेंजीन कार्सिनोजेनिक कंपाउंड है जो कैंसर का खतरा बढ़ाता है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ख़त्म कर देता है। कई महीनो तक इस रसायन के संपर्क में रहने के कारण लंग कैंसर, ब्लड कैंसर और स्किन कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। हड्डियों को भी नुकसान पहुचता है। ये बॉन मेरो को भी प्रभावित करता है, जिसके कारण रेड ब्लड सेल्स घट जाते हैं और एनेमिया की शिकायत हो जाती है। बेंजीन के कारण लिवर व गुर्दे भी प्रभावित होते हैं। ऐसे मैं कार का एसी चालू करने के पहले कार के शीशे थोड़ी देर के लिए खोल दें।

व्यक्तित्व का आभूषण है धैर्य का धारण


मनुष्य कई बार ऐसी परिस्थितियों में फँस जाता है, जब वह अपने आप को बहुत असहाय पाता है। परेशानियों से मुक्ति का कोई उपाय नहीं सूझता और मदद करने वाले लोग भी अपने हाँथ  खींच लेते हैं। ऐसे में अक्सर मनुष्य या तो लोगों के प्रति दुर्भावनाएं पाल लेता है या हताशा का शिकार हो जाता है। मनुष्य अनेक उतार-चढ़ाव से होकर गुज़रता है। जिन्हें हम अवतारी चरित्रों के रूप में पूजते हैं। मानव योनि में परेशानियों का सामना। उन्हें भी करना पड़ा है। उनसे जुडी कहानियां बताती हैं कि विपरीत परिस्थितियों में अदम्य साहस और अदभुत धैर्य का परिचय देकर ही वे अपने व्यक्तित्व को महान बना सके हैं।
        
सार्वभौमिक सत्य है कि विफलताओं के बावजूद कोशिशों का क्रम केवल धैर्य और विश्वास और आस्था के साथ हार को जीत में बदलने वाले योद्धाओं से इतिहास भरा हुआ है।
तुलसीदास जी ने एक स्थान पर लिखा भी है, धीरज, धर्म, मित्र, अरु नारी / आपद काल परखिये चारि। जब जीवन में कठिन हालात हों तभी व्यक्ति को स्वयं के धैर्य, कर्तव्य साधना, साथियों और जीवनसाथी की निष्ठा का सही अनुमान हो पाता है।
पुरातन काल से आधुनिक काल तक अनेक उदाहरण हैं-
धैर्य ने पोरस को किया अमर
सिकंदर से हारकर जब युद्धबंदी के रूप में पोरस को सिकंदर के सामने प्रस्तुत किया गया। सिकंदर ने दंभ से पूछा, 'तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार किया जाये?' पोरस ने भी उतने ही स्वाभिमान से उत्तर दिया,  'वैसा ही, जैसा एक राजा को दूसरे राजा के साथ करना चाहिए।' सिकंदर यह उत्तर सुन कर अचंभित रह गया। हारा हुआ राजा विश्वविजेता के सम्मुख बराबरी का दावा कैसे कर सकता है? लेकिन पोरस ने किया क्योंकि कठिन परिस्थियों में भी उसने अपने धैर्य का दामन नहीं छोड़ा था और इस लिए युद्ध हारने के बावजूद इतिहास में पोरस का नाम अमर हो गया।

अपनी बंदूकें जमा करो फ्री मैं पिज़्ज़ा ले जाओ


इंडियानापोलिस- अमरीका के इंडियानापोलिस में डोनाल्ड डेंसी डी एंड सी के नाम से रेस्टोरेंट चलाते हैं। वे स्थानीय समुदाय में होने वाले अपराधों को कम करने में अनोखे तरीके से मदद कर रहे हैं। डोनाल्ड ने ऑफर दिया है कि जो लोग उन्हें बंदूकें देंगे, उन्हें वे फ्री में बड़ा पिज़्ज़ा देंगे। वह कहते हैं कि पिज़्ज़ा बनाने में मुझे महारत हासिल है और इस लिए लोग मुझे पिज़्ज़ा मैन कहते हैं।
में अपने इस काम के ज़रिये सड़कों से अपराध कम करना चाहता हूँ। हो सकता है कि मैं सड़कों से बंदूकों को हटा सकूँ। इन अपराधों मैं शामिल लोग, खासतौर पर बच्चों तक यदि मैं पिज़्ज़ा पहुंचा सकूं, तो मैं एक ज़िन्दगी बचा सकता हूँ।

फेसबुक से नंबर शेयर नहीं करना चाहते तो बदलें सेटिंग


अगर आप फेसबुक और व्हाट्सएप्प की नयी कॉन्टेक्ट नंबर शेयरिंग पॉलिसी से परेशान हैं तो घबरायें नहीं। आप चाहें तो अपने व्हाट्सएप्प के सारे कॉन्टेक्ट नंबर फेसबुक को देने से रोक सकते हैं। इसके लिए व्हाट्सऐप की सेटिंग मैं जाकर कुछ बदलाव करने होंगे। एक क्लिक पर आपकी परेशानी दूर हो जायेगी। इसके दो तरीके हैं। पहला, एप पर पॉलिसी को लेकर आने वाले नोटिफिकेशन पर एक्सेप्ट ऑप्शन को न चुनें। हालाँकि कंपनी इसके लिए सिर्फ 30 दिन का समय दे रही है। दूसरा, अगर जल्दीबाज़ी मैं एक्सेप्ट ऑप्शन को चुन लिया है तो उसके बाद भी इस पॉलिसी को ख़ारिज़ कर अपने कॉन्टेक्टस शेयर करने से रोका जा सकता है। ऐसे स्थिति मैं यूजर्स को व्हाट्सएप्प की सेटिंग मैं जाना होगा। वहां पर अकाउंट के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। वहां पर एक्सेप्ट किये गए क्लिक को अनक्लिक करना होगा।

नटवरलाल की दुनिया


एक महान ठग जो दुनिया भर के लोगों की प्रेरणा बना
नटवरलाल का नाम आपने जरूर सुना होगा लेकिन क्या आपको पता है कि शातिर ठगों का प्रयाय बन चुका यह नाम सबसे पहले आखिर किसके लिए इस्तेमाल किया गया था। उस ठग का असली नाम था मिथलेश कुमार श्रीवास्तव जिसका जन्म बिहार के सीवान जिले में हुआ था। इनकी ठगी से टाटा, बिरला अंबानी कोई भी न बचा। उसने ताजमहल, लाल किला, राष्ट्रपति भवन और यहां तक की संसद भवन को भी बेच डाला। वह भी एक बार नहीं बल्कि कई बार।
यह एक ऐसा ठग था जो ठगी के कारनामों के चलते अपने जीवन काल में ही किंवदंती बन गया। एक ऐसा ठग जिसके गांव के लोग इस बात पर गर्व महसूस करते हैं कि वे उनके गांव में पैदा हुए थे। एक ऐसा ठग जिसे देशभर के ठग अपना आदर्श मानते हैं। इस ठग का उपनाम था नटवरलाल जो बाद में हर शातिर ठग के लिए प्रयोग होने लगा। लेकिन भाई असली तो असली होता है ना
मिथलेश कुमार श्रीवास्तव का जन्म सन 1912 में बंगरा गांव में हुआ था जो बिहार के सीवान जिले में पड़ता है। ठग बनने से पहले वह एक वकील था। नटवरलाल ने अपने जीवनकाल में सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी की और उसके 50 से भी अधिक फर्जी नाम थे। वह प्रसिद्ध लोगों के फर्जी हस्ताक्षर करने में भी माहिर था। उसने बड़े-बड़े उद्योगपतियों को चूना लगाया था जिसमें टाटा, बिरला, अंबानी के नाम शामिल है।
नटवरलाल ने नकली चेक और डिमांड ड्राफ्ट देकर कई दुकानदारों से लाखों रुपए ऐंठे। उस पर 100 से अधिक केस दर्ज हुए और उसके पीछे 8 राज्यों की पुलिस पड़ी थी। वह पकड़ा भी गया और उसे 113 साल की जेल की सजा भी हुई लेकिन देश की कोई भी जेल नटवरलाल को रोक नहीं पाई। देश की अलग-अलग जेलों से वह 8 बार भाग निकलने में कामयाब हुआ। 1996 में जब वह आखिरी बार जेल से भागा तो उसकी उम्र 84 साल की थी और वह व्हीलचेयर पर चलता था। उसे पुलिस की निगरानी में इलाज के लिए कानपुर जेल से नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में लाया गया था। 24 जून 1996 को नटवारलाल को आखिरी बार देखा गया और उसके बाद पुलिस उसे कभी पकड़ नहीं पाई।

नटवरलाल का जीवन जिस तरह रहस्यमयी रहा उसकी मृत्यु भी उसी तरह रहस्यमयी रही। 2009 में नटवरलाल के वकील ने कोर्ट में अर्जी दायर की कि उनके खिलाफ लंबित 100 से अधिक मामलों को रद्द कर दिया जाए क्योंकि 25 जुलाई 2009 को उनकी मृत्यु हो गई है। हालांकि नटवरलाल के भाई गंगा प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि नटवरलाल की मृत्यु सन 1996 में ही हो गई थी और उनका रांची में अंतिम संस्कार किया गया था।

कड़वी सच्चाई


37 WONDERFUL TRUTH OF LIFE
"SHARE. ....CARE.... &.... INSPIRE"
*दिल को छुले ऐसी खूबसूरत लाइन*
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1. *क़ाबिल लोग न तो किसी को दबाते हैं और न ही किसी से दबते हैं*।
2. *ज़माना भी अजीब हैं, नाकामयाब लोगो का मज़ाक उड़ाता हैं और कामयाब लोगो से जलता हैं*।
3. *कैसी विडंबना हैं ! कुछ लोग जीते-जी मर जाते हैं*, *और कुछ लोग मर कर भी अमर हो जाते हैं*
4. *इज्जत किसी आदमी की नही जरूरत की होती हैं. जरूरत खत्म तो इज्जत खत्म*।
5. *सच्चा चाहने वाला आपसे प्रत्येक तरह की बात करेगा*. *आपसे हर मसले पर बात करेगा लेकिन*
*धोखा देने वाला सिर्फ प्यार भरी बात करेगा*।
6. *हर किसी को दिल में उतनी ही जगह दो जितनी वो देता हैं.. वरना या तो खुद रोओगे, या वो तुम्हें रूलाऐगा*
7. *खुश रहो लेकिन कभी संतुष्ट मत रहो*
8. *अगर जिंदगी में सफल होना हैं तो पैसों को हमेशा जेब में रखना, दिमाग में नही*
9. *इंसान अपनी कमाई के हिसाब से नही,अपनी जरूरत के हिसाब से गरीब होता हैं*
10. *जब तक तुम्हारें पास पैसा हैं, दुनिया पूछेगी भाई तू कैसा हैं*
11. *हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ छिपा होता हैं ऐसी कोई भी मित्रता नही जिसके पीछे स्वार्थ न छिपा हो*
12. *दुनिया में सबसे ज्यादा सपने तोड़े हैं इस बात ने,कि लोग क्या कहेंगे*..
13. *जब लोग अनपढ़ थे तो परिवार एक हुआ करते थे, मैने टूटे परिवारों में अक्सर पढ़े-लिखे लोग देखे हैं*
14. *जन्मों-जन्मों से टूटे रिश्ते भी जुड़ जाते हैं बस सामने वाले को आपसे काम पड़ना चाहिए*
15. *हर प्रॉब्लम के दो सोल्युशन होते हैं.. भाग लो*..
*(RUN AWAY) भाग लो*..
*(PARTICIPATE) पसंद आपको ही करना हैं*
16. *इस तरह से अपना व्यवहार रखना चाहिए कि अगर कोई तुम्हारे बारे में बुरा भी कहे, तो कोई भी उस पर विश्वास न करे*
17. *अपनी सफलता का रौब माता पिता को मत दिखाओ, उन्होनें अपनी जिंदगी हार के आपको जिताया हैं*
18. *यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा ‘आप’ शब्द का, उसके बाद ‘हम’ शब्द का और सबसे कम ‘मैं’ शब्द का उपयोग करना चाहिए*
19. *इस दुनिया मे कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा*
20. *दुनिया के दो असम्भव काम- माँ की “ममता” और पिता की “क्षमता” का अंदाज़ा लगा पाना*
21. *कितना कुछ जानता होगा वो शख़्स मेरे बारे में जो मेरे मुस्कराने पर भी जिसने पूछ लिया कि तुम उदास क्यों हो*
22. *यदि कोई व्यक्ति आपको गुस्सा दिलाने मे सफल रहता हैं तो समझ लीजिये आप उसके हाथ की कठपुतली हैं*
23. *मन में जो हैं साफ-साफ कह देना चाहिए Q कि सच बोलने से फैसलें होते हैं और झूठ बोलने से फासलें*
24. *यदि कोई तुम्हें नजरअंदाज कर दे तो बुरा मत मानना, Q कि लोग अक्सर हैसियत से बाहर मंहगी चीज को नजरंअदाज कर ही देते हैं*
25. *संस्कारो से भरी कोई धन दौलत नही है*
26. *गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना, Q कि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं*
27. *दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना स्वार्थ के प्यार करते हैं*
28. *कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों मे डालकर*
29. *घर आये हुए अतिथि का कभी अपमान मत करना, क्योकि अपमान तुम उसका करोगे और तुम्हारा अपमान समाज करेगा*
30. *जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा*
31. *हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती*
32. *दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 100 कि.ग्रा.अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता*
33. *जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना (ये याद रखना कभी नीचा नही देखना पड़ेगा)*
34. *मेने कई अपनों को वास्तविक जीवन में शतरंज खेलते देखा है*
35. *जिनमें संस्कारो और आचरण की कमी होती हैं वही लोग दूसरे को अपने घर बुला कर नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं*
36. *मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे ईशवर बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते*
37. *अगर आप किसी को धोखा देने में कामयाब हो जाते हैं तो मान कर चलना की ऊपर वाला भी आपको धोखा देगा क्योकि उसके यहाँ हर बात का इन्साफ जरूर होता है*
ॐ नमः शिवाय


Friday, 26 August 2016

जीवन मंत्र


जिंदगी ही चमत्कार है।
आपके पास जीवन जीने के सिर्फ दो हो तरीके हैं। पहला यह कि जीवन में चमत्कार जैसा कुछ भी नहीं और दूसरा यह की जीवन में जो कुछ भी है, वह सब चमत्कार है।
अल्बर्ट आइंस्टाइन, साइंटिस्ट

सिंगापुर के डिप्टी पीएम की नसीहत.....


मोदी जी आप अच्छी पिच पर हैं, एक-एक रन नहीं लीजिए
न्यू दिल्ली. राजग सरकार देश में सुधारों की गति पर भले उत्साहित हो लेकिन सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री थरमन शनमुगरक्कम इन उपलब्धियों से कुछ खास प्रभावित नहीं हैं। थरमन ने यहाँ शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। उन्होंने कहा की सुधारों का एजेंडा बड़े पैमानों पर अधूरा है इसकी गति को तेज़ करने की जरुरत है। मोदी को सलाह देते हुए कहा की आप अच्छी बैटिंग विकेट पर हैँ, इसलिए एक-एक रन न लें। थरमन की यह प्रतिक्रिया नीति आयोग के द्वारा प्रायोजित लेक्चर सीरीज़ के उद्घाटन मौके पर आई है।

Thursday, 25 August 2016

सही दिशा


एक पहलवान जैसा, हट्टा-कट्टा, लंबा-चौड़ा व्यक्ति सामान लेकर किसी स्टेशन पर उतरा। उसनेँ एक टैक्सी वाले से कहा कि मुझे साईँ बाबा के मंदिर जाना है।
टैक्सी वाले नेँ कहा- 200 रुपये लगेँगे। उस पहलवान आदमी नेँ बुद्दिमानी दिखाते हुए कहा- इतने पास के दो सौ रुपये, आप टैक्सी वाले तो लूट रहे हो। मैँ अपना सामान खुद ही उठा कर चला जाऊँगा।
वह व्यक्ति काफी दूर तक सामान लेकर चलता रहा। कुछ देर बाद पुन: उसे वही टैक्सी वाला दिखा, अब उस आदमी ने फिर टैक्सी वाले से पूछा – भैया अब तो मैने आधा से ज्यादा दुरी तर कर ली है तो अब आप कितना रुपये लेँगे?
टैक्सी वाले नेँ जवाब दिया- 400 रुपये।
उस आदमी नेँ फिर कहा- पहले दो सौ रुपये, अब चार सौ रुपये, ऐसा क्योँ।
टैक्सी वाले नेँ जवाब दिया- महोदय, इतनी देर से आप साईँ मंदिर की विपरीत दिशा मेँ दौड़ लगा रहे हैँ जबकि साईँ मँदिर तो दुसरी तरफ है।
उस पहलवान व्यक्ति नेँ कुछ भी नहीँ कहा और चुपचाप टैक्सी मेँ बैठ गया।
इसी तरह जिँदगी के कई मुकाम मेँ हम किसी चीज को बिना गंभीरता से सोचे सीधे काम शुरु कर देते हैँ, और फिर अपनी मेहनत और समय को बर्बाद कर उस काम को आधा ही करके छोड़ देते हैँ। किसी भी काम को हाथ मेँ लेनेँ से पहले पुरी तरह सोच विचार लेवेँ कि क्या जो आप कर रहे हैँ वो आपके लक्ष्य का हिस्सा है कि नहीँ।
हमेशा एक बात याद रखेँ कि दिशा सही होनेँ पर ही मेहनत पूरा रंग लाती है और यदि दिशा ही गलत हो तो आप कितनी भी मेहनत का कोई लाभ नहीं मिल पायेगा। इसीलिए दिशा तय करेँ और आगे बढ़ेँ कामयाबी आपके हाथ जरुर थामेगी।

मुसीबत ज़िन्दगी की सच्चाई है...


हमारी ज़िंदगी की एक सच्चाई है। कोई इस बात को समझ लेता है तो कोई पूरी ज़िंदगी इसका रोना रोता है। ज़िंदगी के हर मोड़ पर हमारा सामना मुसीबतों(problems) से होता है. इसके बिना ज़िंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती।

अक्सर हमारे सामने मुसीबते आती है तो तो हम उनके सामने पस्त हो जाते है। उस समय हमे कुछ समझ नहीं आता की क्या सही है और क्या गलत। हर व्यक्ति का परिस्थितियो को देखने का नज़रिया अलग अलग होता है। कई बार हमारी ज़िंदगी मे मुसीबतों का पहाड़ टूट पढ़ता है। उस कठिन समय मे कुछ लोग टूट जाते है तो कुछ संभाल जाते है।

मनोविज्ञान के अनुसार इंसान किसी भी problem को दो तरीको से देखता है;

1 problem पर focus करके(problem focus peoples)

2 solution पर focus करके(solution focus peoples)

Problem focus peoples अक्सर मुसीबतों मे ढेर हो जाते है। इस तरीके के इंसान किसी भी मुसीबत मे उसके हल के बजाये उस मुसीबत के बारे मे ज्यादा सोचते है। वही दूसरी ओर solution focus peoples मुसीबतों मे उसके हल के बारे मे ज्यादा सोचते है। इस तरह के इंसान मुसीबतों का डट के सामना करते है।

दोस्तो आज मै आपके साथ एक महान solution focus इंसान की कहानी शेयर करने जा रहा हु जो आपको किसी भी मुसीबत से लड़ने के लिए प्रोत्साहित (motivate) करेगी। दोस्तो आपने नेपोलियन बोनापार्ट (napoleon Bonaparte) का नाम तो सुना ही होगा। जी हा वही नापोलियन बोनापार्ट जो फ़्रांस के एक महान निडर और साहसी शासक थे जिनके जीवन मे असंभव नाम का कोई शब्द नहीं था। इतिहास में नेपोलियन को विश्व के सबसे महान और अजय सेनापतियों में से एक गिना जाता है। वह इतिहास के सबसे महान विजेताओं में से माने जाते थे । उसके सामने कोई रुक नहीं पाता था।

नेपोलियन के बुलंद होसलों की कहानी- a motivational story

नेपोलियन अक्सर जोखिम (risky) भरे काम किया करते थे। एक बार उन्होने आलपास पर्वत को पार करने का ऐलान किया और अपनी सेना के साथ चल पढे। सामने एक विशाल और गगनचुम्बी पहाड़ खड़ा था जिसपर चढ़ाई करने असंभव था। उसकी सेना मे अचानक हलचल की स्थिति पैदा हो गई। फिर भी उसने अपनी सेना को चढ़ाई का आदेश दिया। पास मे ही एक बुजुर्ग औरत खड़ी थी। उसने जैसे ही यह सुना वो उसके पास आकर बोले की क्यो मरना चाहते हो। यहा जितने भी लोग आये है वो मुह की खाकर यही रहे गये। अगर अपनी ज़िंदगी से प्यार है तो वापिस चले जाओ। उस औरत की यह बात सुनकर नेपोलियन नाराज़ होने की बजाये प्रेरित हो गया और झट से हीरो का हार उतारकर उस बुजुर्ग महिला को पहना दिया और फिर बोले; आपने मेरा उत्साह दोगुना कर दिया और मुझे प्रेरित किया है। लेकिन अगर मै जिंदा बचा तो आप मेरी जय-जयकार करना। उस औरत ने नेपोलियन की बात सुनकर कहा- तुम पहले इंसान हो जो मेरी बात सुनकर हताश और निराश नहीं हुए। ‘ जो करने या मरने ‘ और मुसीबतों का सामना करने का इरादा रखते है, वह लोग कभी नही हारते।

आज सचिन तेंदुलकर (sachin tendulkar) को इसलिए क्रिकेट (cricket) का भगवान कहा जाता है क्योकि उन्होने जरूरत के समय ही अपना शानदार खेल दिखाया और भारतीय टीम को मुसीबतों से उभारा। ऐसा नहीं है कि यह मुसीबते हम जैसे लोगो के सामने ही आती है, भगवान राम के सामने भी मुसीबते आयी है। विवाह के बाद, वनवास की मुसीबत। उन्होने सभी मुसीबतों का सामना आदर्श तरीके से किया। तभी वो मर्यादा पुरषोतम कहलाये जाते है। मुसीबते ही हमें आदर्श बनाती है।

रोटी और भूख !


रोटी और भूख एक महात्मा जी शाम के वक्त टहलने निकले तो एक निर्धन को जंगल में इधर-उधर कुछ खोजते हुए देखकर पूछा।'बाबा क्या खोज रहे हो?'निर्धन बड़े ही करुण शब्दों में बोला-कुछ खाने योग्य फल-फूल मिल जाए तो पेट की आग बुझाऊँ। कुछ आगे जाने पर महात्मा जी को एक सेठजी कुछ खोजते हुए मिले।उत्सुकता से उन्होंने पूछा, सेठजी, इस जंगल में क्या खोज रहे हो?सेठजी ने कहा,'वैद्य द्वारा बताई गई औषधि की पत्तियां खोज रहा हूँ ताकि मुझे भूख लग सके क्योंकि मुझे कई दिनों से भूख नहीं लग रही है। महात्मा जी ने आकाश की ओर हाथ उठाकर कहा-यह क्या है प्रभु? गरीब रोटी ढूंढता है और अमीर भूख। आज आवश्यकता इस बात की है कि जन-जन में सहयोग,अपनत्व एवं मदद की भावनाओं का संचार किया जाये।

सांपों के देश में एक ऐसा नेवला

सांपों के देश में एक ऐसा नेवला पैदा हो गया, जो सांप तो क्या, किसी भी जानवर से लड़ना नहीं चाहता था। सभी नेवलों में यह बात फैल गई। आखिरकार एक ...