एक मिट्टी का घड़ा और एक पीतल का घड़ा नदी किनारे घाट पर रखे हुए थे। नदी की धारा ने उन्हें नदी में खींच लिया, और वे नदी में बहने लगे। मिट्टी का घड़ा पानी की बड़ी-बड़ी लहरों को देखकर चिंतित हो गया। पीतल के घड़े ने उसे चिंतित देखकर दिलासा दिया, 'परेशान मत हो। किसी भी संकट में मैं तुम्हारी सहायता करूंगा।' अरे नहीं।' मिट्टी का घड़ा भयभीत स्वर में बोला, 'कृपा करके मुझसे जितना दूर रह सकते हो उतना दूर रहना! मेरे भय का वास्तविक कारण तुम ही हो। भले ही लहरें मुझे तुमसे टकरा दें या तुम्हें मुझसे टकरा दें, टूटना मुझे ही है।'
Monday, 26 December 2016
Saturday, 24 December 2016
मोबाइल पर लंबी बातें, बन सकती हैं कैंसर का कारण
अगर मोबाइल पर देर तक बातें करने की आदत है तो सावधान हो जाइए। ये आपको कई तरह के रोग देने के अलावा कैंसर का कारण भी बन सकती है। हाल ही अमरीकी सरकार द्वारा चलाए जा रहे नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम के तहत हुई रिसर्च में यह बात सामने आई है।
शोध में हुआ साबित
मोबाइल के नकारात्मक प्रभाव का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने चूहे पर इसका परिक्षण किया। रिसर्च के दौरान चूहे को मोबाइल की रेडियो फ्रीक्वेंसी के बीच रखा गया। रिसर्च में इनके दिमाग और हृदय में ट्यूमर मिले। वहीं ऐसे चूहे जिन्हें रेडियो फ्रीक्वेंसी से दूर रखा गया वे सामान्य स्थिति में मिले। नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम के रिसर्च के बाद शायद अब लोग लंबी बातें करना बंद कर देंगे। क्योंकि ज्यादातर लोगों का कहना है कि इससे कोई नुकसान नहीं होता।
डीएनए होता है प्रभावित
वहीं एक अन्य शोध में सामने आया कि मोबाइल पर लंबी बातचीत कोशिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। शोधकर्ता यानिव हमजानी का कहना है कि उन्होंने मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले लोगों की लार पर रिसर्च की। जिसमें सामने आया कि ऐसे लोगों में कोशिकाओं में उत्पन्न होने वाला तनाव डीएनए को प्रभावित करने के अलावा कैंसर का भी कारण बनता है।
अच्छा-बुरा
एक महात्मा किसी राजा के महल में उसका आतिथ्य स्वीकार करने गया। राजा ने उन्हें सत्कार देते हुए कुछ दिन वहीं रुकने को कहा। समय मिलने पर वे दोनों प्रतिदिन धर्म-चर्चा करने लगे। एक दिन राजा ने महात्मा से कहा, 'सूरज के निकलने पर दिए बुझा दिए जाते हैं। बारिश होने के बाद खेत में पानी नहीं दिया जाता। आप मेरे राज्य में आ गए हैं तो मुझे शासन करने की आवश्यकता नहीं हैं। मेरे शासन में हर तरफ अव्यवस्था है, पर आप शासन करेंगे तो सब कुछ व्यवस्थित हो जाएगा।' महात्मा ने उत्तर दिया, ' तुम्हारा शासन सर्वोत्तम नहीं है, पर बुरा भी नहीं है। मेरे शासक बन जाने पर लोगों को यह लगेगा कि मैंने शक्ति और संपत्ति के लालच में राज करना स्वीकार कर लिया है। उनके इस प्रकार सोचने पर और अधिक अव्यवस्था फैलेगी। मेरा राजा बनना वैसा ही होगा, जैसे कोई अतिथि के भेष में घर का मालिक बन बैठे।' राजा को यह सुनकर निराशा हुई। महात्मा ने कहा, 'चिड़िया घने जंगल में अपना घोंसला बनाती है, पर पेड़ की एक डाल ही चुनती है। पशु नदी से उतना ही जल पीते हैं, जितने से उनकी प्यास बुझ जाती है। भले हो कोई रसोइया अपने भोजनालय को साफ़-सुथरा नहीं रखता हो, पर कोई पुजारी उसका स्थान नहीं ले सकता।
Thursday, 22 December 2016
राजा और भिखारी
एक बार एक राजा था, वह जब भी मंदिर जाता, तो 2 भिखारी उसके दाएं और बाएं बैठा करते..
*दाईं तरफ़ वाला कहता:
"हे ईश्वर, तूने राजा को बहुत कुछ दिया है, मुझे भी दे दे.!"
*बाईं तरफ़ वाला कहता:
"ऐ राजा.! ईश्वर ने तुझे बहुत कुछ दिया है, मुझे भी कुछ दे दे.!"
दाईं तरफ़ वाला भिखारी बाईं तरफ़ वाले से कहता:
ईश्वर से माँग वह सबकी सुनने वाला है..
बाईं तरफ़ वाला जवाब देता: "चुप कर मुर्ख.."
एक बार राजा ने अपने मंत्री को बुलाया और कहा कि मंदिर में दाईं तरफ जो भिखारी बैठता है वह हमेशा ईश्वर से मांगता है तो अवश्य ईश्वर उसकी ज़रूर सुनेगा..
लेकिन जो बाईं तरफ बैठता है वह हमेशा मुझसे फ़रियाद करता रहता है, तो तुम ऐसा करो कि एक बड़े से बर्तन में खीर भर के उसमें स्वर्ण मुद्रा डाल दो और वह उसको दे आओ.!
मंत्री ने ऐसा ही किया.. अब वह भिखारी मज़े से खीर खाते-खाते दूसरे भिखारी को चिड़ाता हुआ बोला: "हुह... बड़ा आया ईश्वर देगा..', यह देख राजा से माँगा, मिल गया ना.?"
खाते खाते जब इसका पेट भर गया तो इसने बची हुई खीर का बर्तन उस दूसरे भिखारी को दे दिया और कहा: "ले पकड़... तू भी खाले, मुर्ख.."
अगले दिन जब राजा आया तो देखा कि बाईं तरफ वाला भिखारी तो आज भी वैसे ही बैठा है लेकिन दाईं तरफ वाला ग़ायब है..
राजा नें चौंक कर उससे पूछा: "क्या तुझे खीर से भरा बर्तन नहीं मिला.?"
भिखारी: "जी मिला था राजा जी, क्या स्वादिस्ट खीर थी, मैंने ख़ूब पेट भर कर खायी.!"
राजा: "फिर..?!!?"
भिखारी: "फ़िर जब मेरा पेट भर गया तो वह जो दूसरा भिखारी यहाँ बैठता है मैंने उसको दे दी, मुर्ख हमेशा कहता रहता है: ' ईश्वर देगा, ईश्वर देगा.!' ले खा ले!
राजा मुस्कुरा कर बोला: "अवश्य ही, ईश्वर ने उसे दे दिया.!"
ईश्वर पर भरोसा रखें...
Wednesday, 21 December 2016
पेड़ का दुर्भाग्य
एक आदमी के बगीचे में एक पेड़ था। बगीचा छोटा था और पेड़ काफी बढ़ गया था। एक दिन आदमी के पड़ोसी ने उससे कहा, 'ऐसे पेड़ मनहूस होते हैं। तुम्हें इसे काट देना चाहिए।' आदमी ने उस पेड़ को काट दिया और उसके जलावन के लट्ठे बना दिए। लट्ठे इतने ज्यादा थे कि पूरा बगीचा उनसे भर गया। बगीचे के पौधे और फूल लट्ठों के नीचे दबकर खराब होने लगे। आदमी के पड़ोसी ने उससे कहा, 'इन लट्ठों को मैं ले लेता हूं, ताकि तुम्हारे पौधे और फूल सही -सलामत रहें।' कुछ दिनों के बाद आदमी के मन में विचार आया, 'शायद मेरा पेड़ मनहूस नहीं था। जलावन की लकड़ी के लालच में आकर पड़ोसी ने मेरा अच्छा-भला पेड़ कटवा दिया।' वह अपने गुरु के पास सलाह लेने पहुंचा। गुरु ने मुस्कराते हुए कहा, 'जैसे कि तुम्हारे पड़ोसी ने कहा था, वह पेड़ वास्तव में मनहूस था। क्योंकि उसे अब काट कर जलाया जा चूका है। यह उस पेड़ का दुर्भाग्य ही था कि वह तुम जैसे मुर्ख के बगीचे में लगा था।' गुरु ने उसे सांत्वना देते हुए कहा, 'अच्छी बात यह है कि तुम अब उतने मुर्ख नहीं हो। तुमने पेड़ को तो खो दिया, लेकिन एक कीमती सबक सीख लिया है। इस बात को हमेशा ध्यान में रखना कि जब तक तुम स्वयं अपनी समझ पर भरोसा न कर लो, तब तक किसी दूसरे की सलाह नहीं मानना।'
रास्ते का पत्थर
बात बहुत पुरानी है, एक राजा ने मुख्य मार्ग पर बीचों-बीच एक बड़ा पत्थर रखवा दिया। वह एक पेड़ के पीछे छिपकर यह देखने लगा कि कोई उस पत्थर को हटाता है या नहीं। कई राजदरबारी और व्यापारी वहां से गुजरे और उनमें से कई ने ऊंचे स्वर में राजा की इस बात के लिए निंदा की कि राज्य की सड़क व्यवस्था ठीक नहीं थी लेकिन किसी ने भी उस पत्थर को स्वयं हटाने का कोई प्रयास नहीं किया। फिर वहां से एक किसान गुजरा, जिसकी पीठ पर अनाज का बोरा लदा हुआ था। पत्थर के पास पहुंचने उसने अपना बोझा एक और रख दिया और पत्थर को हटाने का प्रयास करने लगा। बहुत कठोर परिश्रम करने के बाद वह उसे हटाने में सफल हो गया। किसान को उस जगह पर बटुआ रखा दिखा। बटुए में सोने के सिक्के थे और राजा का लिखा हुआ एक पत्र था। पत्र में लिखा था कि सोने के सिक्के पत्थर हटाने वाले के लिए उपहारस्वरूप थे। उस किसान ने इससे वह सबक सीखा, जो हममें से बहुत कम ही समझ पाते हैं, 'हमारे मार्ग में आने वाली हर बाधा हमें उन्नति करने का अवसर प्रदान करती है।'
Thursday, 15 December 2016
हर पिता के भाग्य मे बेटी नहीं होती
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*राजा दशरथ जब अपने चारों बेटों की बारात लेकर राजा जनक के द्वार पर पहुँचे तो राजा जनक ने सम्मानपूर्वक बारात का स्वागत किया।*
*तभी दशरथ जी ने आगे बढकर जनक जी के चरण छू लिये।चाॅककर जनक जी ने दशरथ जी को थाम लिया और बोले महाराज आप मुझसे बड़े है और तो और वरपक्ष वाले है ये उल्टी गंगा कैसे बहा रहे हैं .....?*
*इस पर दशरथ जी ने बड़ी सुंदर बात कही,महाराज आप दाता हो कन्यादान कर रहै हो,मैं तो याचक हूँ आपके द्वार कन्या लेने आया हूँ ,,अब आप ही बताऔ दाता और याचक में बड़ा कौन है ,?*
*यह सुनकर जनक जी की आखो मे अश्रुधारा बह निकली..... ।।*
*भाग्यशाली है वो लोग जिनके घर में होतीं है बेटियाँ, हर बेटी के भाग्य मे पिता होता है लेकिन हर पिता के भाग्य मे बेटी नहीं होती ।।*
अच्छा लगे तो शेयर करना
*Plz save girl's save daughters*
Tuesday, 13 December 2016
पोशाक
सुंदरता और भद्दापन एक दिन सागर किनारे मिल गए। आपस में बोले, 'चलो नहाते हैं।' उन्होंने कपड़े उतारे और पानी में उतार गए। कुछ देर बाद भद्दापन किनारे पर आया। उसने सुंदरता के कपडे पहने और चला गया। सुंदरता भी सागर से बहार आयी। उसे अपने कपड़े नहीं मिले। अपने नंगेपन पर उसे शर्म आने लगी। इसलिए उसने भद्दापन के कपड़े उठाए और पहनकर अपने रास्ते चली गयी। उसी दिन से लोग दूसरे जैसा दिखने की गलती करते हैं।
मेरा वृन्दावन
🌹 *अतिसुंदर कथा* 🌹
*मेरा वृन्दावन*
एक राजा ने भगवान कृष्ण का एक मंदिर बनवाया
और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया. पुजारी बड़े भाव से
बिहारीजी की सेवा करने लगे. भगवान की पूजा-अर्चना और
सेवा-टहल करते पुजारी की उम्र बीत गई. राजा रोज एक फूलों की
माला सेवक के हाथ से भेजा करता था.पुजारी वह माला बिहारीजी
को पहना देते थे. जब राजा दर्शन करने आता तो पुजारी वह माला बिहारीजी के गले से उतारकर राजा को पहना देते थे. यह रोज का
नियम था. एक दिन राजा किसी वजह से मंदिर नहीं जा सका.
उसने एक सेवक से कहा- माला लेकर मंदिर जाओ. पुजारी से कहना
आज मैं नहीं आ पाउंगा. सेवक ने जाकर माला पुजारी को दे दी और
बता दिया कि आज महाराज का इंतजार न करें. सेवक वापस आ
गया. पुजारी ने माला बिहारीजी को पहना दी. फिर उन्हें विचार आया कि आज तक मैं अपने बिहारीजी की चढ़ी माला
राजा को ही पहनाता रहा. कभी ये सौभाग्य मुझे नहीं
मिला.जीवन का कोई भरोसा नहीं कब रूठ जाए. आज मेरे प्रभु ने
मुझ पर बड़ी कृपा की है. राजा आज आएंगे नहीं, तो क्यों न माला
मैं पहन लूं. यह सोचकर पुजारी ने बिहारीजी के गले से माला
उतारकर स्वयं पहन ली. इतने में सेवक आया और उसने बताया कि राजा की सवारी बस मंदिर में पहुंचने ही वाली है.यह सुनकर
पुजारी कांप गए. उन्होंने सोचा अगर राजा ने माला मेरे गले में देख
ली तो मुझ पर क्रोधित होंगे. इस भय से उन्होंने अपने गले से
माला उतारकर बिहारीजी को फिर से पहना दी. जैसे ही राजा
दर्शन को आया तो पुजारी ने नियम अुसार फिर से वह माला
उतार कर राजा के गले में पहना दी. माला पहना रहे थे तभी राजा को माला में एक सफ़ेद बाल दिखा.राजा को सारा माजरा समझ गया
कि पुजारी ने माला स्वयं पहन ली थी और फिर निकालकर
वापस डाल दी होगी. पुजारी ऐसाछल करता है, यह सोचकर राजा
को बहुत गुस्सा आया. उसने पुजारी जी से पूछा- पुजारीजी यह
सफ़ेद बाल किसका है.? पुजारी को लगा कि अगर सच बोलता हूं
तो राजा दंड दे देंगे इसलिए जान छुड़ाने के लिए पुजारी ने कहा- महाराज यहसफ़ेद बाल तो बिहारीजी का है. अब तो राजा गुस्से
से आग- बबूला हो गया कि ये पुजारी झूठ पर झूठ बोले जा रहा
है.भला बिहारीजी के बाल भी कहीं सफ़ेद होते हैं. राजा ने कहा-
पुजारी अगर यह सफेद बाल बिहारीजी का है तो सुबह शृंगार के
समय मैं आउंगा और देखूंगा कि बिहारीजी के बाल सफ़ेद है या
काले. अगर बिहारीजी के बाल काले निकले तो आपको फांसी हो जाएगी. राजा हुक्म सुनाकर चला गया.अब पुजारी रोकर
बिहारीजी से विनती करने लगे- प्रभु मैं जानता हूं आपके
सम्मुख मैंने झूठ बोलने का अपराध किया. अपने गले में डाली
माला पुनः आपको पहना दी. आपकी सेवा करते-करते वृद्ध हो
गया. यह लालसा ही रही कि कभी आपको चढ़ी माला पहनने का
सौभाग्य मिले. इसी लोभ में यह सब अपराध हुआ. मेरे ठाकुरजी पहली बार यह लोभ हुआ और ऐसी विपत्ति आ पड़ी है. मेरे
नाथ अब नहींहोगा ऐसा अपराध. अब आप ही बचाइए नहीं तो
कल सुबह मुझे फाँसी पर चढा दिया जाएगा. पुजारी सारी रात रोते
रहे. सुबह होते ही राजा मंदिर में आ गया. उसने कहा कि आज
प्रभु का शृंगार वह स्वयं करेगा. इतना कहकर राजा ने जैसे ही मुकुट
हटाया तो हैरान रह गया. बिहारीजी के सारे बाल सफ़ेद थे. राजा को लगा, पुजारी ने जान बचाने के लिए बिहारीजी के बाल रंग
दिए होंगे. गुस्से से तमतमाते हुए उसने बाल की जांच करनी
चाही. बाल असली हैं या नकली यब समझने के लिए उसने जैसे
ही बिहारी जी के बाल तोडे, बिहारीजी के सिर से खून
कीधार बहने लगी. राजा ने प्रभु के चरण पकड़ लिए और क्षमा
मांगने लगा. बिहारीजी की मूर्ति से आवाज आई- राजा तुमने आज तक मुझे केवल मूर्ति ही समझा इसलिए आज से मैं तुम्हारे
लिए मूर्ति ही हूँ. पुजारीजी मुझे साक्षात भगवान् समझते हैं.
उनकी श्रद्धा की लाज रखने के लिए आज मुझे अपने बाल सफेद
करने पड़े व रक्त की धार भी बहानी पड़ी तुझे समझाने के लिए.
यह कहानी किसी पुराण से तो नहीं है लेकिन इसका मर्म
किसी पुराण की कथा से कम भी नहीं है. कहते हैं- समझो तो देव नहीं तो पत्थर.श्रद्धा हो तो उन्हीं पत्थरों में भगवान सप्राण
होकर भक्त से मिलने आ जाएंगे ।।
श्री वृन्दावन बांके बिहारी लाल की जय हो ।।
🌹🌹 *!! जय श्री कृष्णा !!* 🌹🌹
Saturday, 10 December 2016
परोपकारिता
जब यमराज ने परोपकारी को भक्त से श्रेष्ठ माना
एक अमीर आदमी विभिन्न मंदिरों में जनकल्याणी कार्यों के लिए धन देता था। विभिन्न उत्सवों व त्योहारों पर भी वह दिल खोलकर खर्च करता। शहर के लगभग सभी मंदिर उसके दिए दान से उपकृत थे। इसलिए लोग उसे काफी इज्जत देते थे। उस संपन्न व्यक्ति ने एक नियम बना रखा था कि वह प्रतिदिन मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाता था। दूसरी ओर एक निर्धन व्यक्ति था नित्य तेल का दीपक जलाकर एक अंधेरी गली में रख देता था जिससे लोगो को आने-जाने में असुविधा न हो। संयोग से दोनो की मृत्यु एक ही दिन हुई। दोनों यमराज के पास साथ-साथ पहुंचे। यमराज ने दोनों से उनके कार्यों का लेखा–जोखा पूछा। सारी बात सुनकर यमराज ने धनिक को निम्न श्रेणी और निर्धन को उच्च श्रेणी की सुख सुविधाएं दी। धनिक ने क्रोधित होकर पूछा यह भेद भाव क्यों? जबकि मैंने आजीवन भगवान के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाया और इसने तेल का दीपक रखा और वो भी अंधेरी गली में, न कि भगवान के समक्ष? तब यमराज ने समझाया पूण्य की महत्ता मूल्य के आधार पर नहीं, कर्म की उपयोगिता के आधार पर होती है। मंदिर तो पहले से ही प्रकाशयुक्त था। इस निर्धन ने ऐसे स्थान पर दीपक जलाकर रखा, जिसका लाभ अंधेरे में जाने वाले लोगों को मिला। उपयोगिता इसके दीपक की अधिक रही। तुमने तो अपना परलोक सुधारने के स्वार्थ से दीपक जलाया था।
सार - यह है कि ईश्वर के प्रति स्वहितार्थ प्रदर्शित भक्ति की अपेक्षा परहितार्थ कार्य करना अधिक पुण्यदायी होता है और ऐसा करने वाला ही सही मायनों में पुण्यात्मा होता है क्योंकि 'स्व' से 'पर' सदा वंदनीय होता है।
Thursday, 8 December 2016
विवेकानंद जी का महिला से निवेदन...
एक विदेशी महिला ने विवेकानंद से कहा - मैं आपसे शादी करना चाहती
हूँ"।
विवेकानंद ने पूछा- "क्यों देवी ? पर मैं तो ब्रह्मचारी
हूँ"।
महिला ने जवाब दिया -"क्योंकि मुझे आपके जैसा
ही एक पुत्र चाहिए, जो पूरी दुनिया में मेरा नाम रौशन करे और वो केवल आपसे शादी
करके ही मिल सकता है मुझे"।
विवेकानंद कहते हैं - "इसका और एक उपाय है"
विदेशी महिला पूछती है -"क्या"?
विवेकानंद ने मुस्कुराते हुए कहा -"आप मुझे ही अपना
पुत्र मान लीजिये और आप मेरी माँ बन जाइए ऐसे में आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल
जाएगा और मुझे अपना ब्रह्मचर्य भी नही तोड़ना पड़ेगा"
महिला हतप्रभ होकर विवेकानंद को ताकने लगी और रोने लग गयी....
ये होती है महान आत्माओ की विचार धारा ।
"पूरे समुंद्र का पानी भी एक जहाज को नहीं डुबा सकता, जब तक पानी को जहाज अन्दर न आने दे......इसी तरह दुनिया का कोई भी नकारात्मक विचार आपको नीचे नहीं गिरा सकता, जब तक आप उसे अपने अंदर आने की अनुमति न दें।"
Tuesday, 6 December 2016
एक फौजी की व्यथा
*भारतीय हो तो पढ़ना और दुसरो को भी भेजना*
```फौजी बनना कोई मजाक नहीं है ।
गाँव का कोई लड़का जब सेना का जवान बनने का सपना देखता है, तो उसकी सुबह रोज़ 4 बजे होती है ।
उठते ही वह गांव की पगडंडियों पर दौड़
लगाता है, उम्र यही कोई 16-17 साल
की होती है ।
चेहरे पर मासूमियत होती है, और कंधे पर होती है घर की ज़िम्मेदारी ।
मध्यम वर्ग का वह लड़का, जो सेना में जाने की तैयारी में दिन-रात एक कर देता है, उसके इस एक सपने से घर में बैठी जवान बहन, बूढ़ी मां और समय के साथ कमज़ोर होते पिता की ढ़ेरों
उम्मीदें ही नहीं जुड़ी होती हैं, बल्कि
जुड़ा होता है एक सच्चे हिन्दुस्तानी
होने का फ़र्ज़ ।
फ़ौजी बनना कोई मज़ाक नहीं है ।
फौज़ी इस देश की शान है, मान है, और
हमारा अभिमान है । देश सेवा के लिए
फौजी हमेशा तत्पर रहते हैं ।
इन्हें न प्रांत से मतलब है और न ही धर्म से, इन्हें तो मतलब है, बस अपने देश से ।
ऐसे इल्जाम मत लगाओ इन पर, ये सर कटा सकते हैं मगर माँ भारती के दामन पर कोई दाग नहीं लगने देंगे ।
नमन है सभी सैनिकों को ।।
कैसे विकास हो उस देश का ..?
👇
जहां डेढ लाख सैलरी हर महीना पाने वाले सांसदो की सैलरी Income Tax Free ........
👇
और
👇
24 घंटे मौत की छांव मे रहने वाले सिपाही को बीस हजार सैलरी पर भी Income Tax देना पडता है ...!
👉 सांसदो को परिवार के साथ रहते हुए भी हर साल पचास हजार Phone Call Free ....
👇
घर सें हजारों km दूर बैठे सैनिक को एक Call भी Free नहीं ..?
👉 एक सांसद को फर्नीचर के लिए 75000 हजार रु
👇
बार्डर पर सैनिक को ड्यूटी के दौरान बारिस से बचने के लिए टूटी हुई छप्पर ...
👉 सांसद को हर साल 34 हवाई टिकट मुफ्त ..!
👇
सैनिक ड्यूटी जाते हुए भी अपने पैसे से टिकट लेता है ....!
👉 सांसद को वाहन के लिए 400000/- का intetest Free लोन
👉 एक सैनिक को घर के लिए लोन भी 12.55% दर से मिलता है ....
👆👆👆और ये सब वहां हो रहा है जहां पूरा देश इस सैनिक की वजह सें अपने परिवार के साथ चैन सें सोता है ..!
🇮🇳
एक बेटी ने
अपनी मां से पूछा :-
👉 मां रेडियो पे सुना ईंडिया जीत गई ..!
जो खेल रहे थे उन्हे एक करोड़
रुपिया मिला ..!
👇
मां बोली : – हाँ बेटी ..!
👇
😊 सरकार कहती है वो देश के लिए खेल रहे थे इसलिए ..!
👇
👉 बेटी आसमान में हैलीकॉप्टर से लटकते जवान को देख के बोली :-
मां क्या इन्हे भी मिलेगा एक करोड़ ..?
👇
😊 मां बोली – ना बेटी ना ..?
👇
हमारे यहां बल्ले से खेलने वाले को ईनाम मिलता है ..!
जान से खेलने वाले को नही ..!! 👈
👆👆👆👆👆
उपरोक्त विचार यदि हृदय को स्पर्श करे तो निवेदन है इसे दूसरे ग्रुपों में अग्रेषित करें ..!```
*Ek Fauji......*
Sunday, 4 December 2016
कैशलेस भारत
*👉🏼अगर सम्पूर्ण भारत कैशलेस (Cashless) हुआ तो:-*
👉 काला पैसा 0%
👉 पैसो की छपाई लागत 0%
👉 कागज़ की बर्बादी 0%
👉 नकली नोट 0℅
👉 बटवा चोर 0%
👉 घोटाले 0%
👉 टैक्स चोरी 0%
👉 समय की बर्बादी 0℅
👉 पैसो की गनती में गड़बड़ी 0%
👉 किडनैपिंग 0%
👉 भ्रष्टाचार 0%
👉 बैंक की लाइने 0%
👉 देश की प्रगति 100%
👉 ईमानदारी 100%
👉 पारदर्शिता 100%
👉 अर्थव्यवथा मजबूत होगी
👉 आतंकवादी कदम नहीं रख पाएगा
👉 नक्सलवाद कम होगा
👉 कागज़ बचेगा, पर्यावरण को लाभ
👉 बैलेंस शीट अपनी पासबुक होगी
👉 एकाउंटिंग प्रिपरेशन चार्जेस कम होंगे
👉 खर्च का सही विश्लेषण होगा
👉 इंडिया जल्दी विकसित देश बन जाएंगा
*दुनिया में कुछ ऐसे देश हैं, जो कैशलेस हैं*
💸बेल्जियम 93% कैशलेस
💸फ्रांस 92% कैशलेस
💸क्यानडा 90% कैशलेस
💸यू के 89% कैशलेस
💸ऑस्ट्रेलिया 86% कैशलेस
आइये सभी मिलकर कैशलेस बनने में सहयोग दे। और आतंकवाद, ब्लैक मनी और भ्रष्टाचार को ख़त्म करे। कोई और देश के लोग कैशलेस बन सकते है तो हम क्यों नहीं। इसे इतना शेयर करो की यह आवाज पुरे भारत में गूंजे और हम गर्व से कह सके.👏🏼👏🏼
*👍🏼👍🏼" We Are Cashless "👍🏼👍🏼*
पैसे से जुड़े हुए कुछ रोचक तथ्य...
आपको आनंद आएगा जरुर पढें☄
भारतीय मुद्रा (रुपया ₹) से जुड़े 31 ग़ज़ब रोचक तथ्य
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1. भारत में करंसी का इतिहास2500 साल पुराना हैं। इसकी शुरूआत एक राजा द्वारा की गई थी❗
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2. अगर आपके पास आधे से ज्यादा (51 फीसदी) फटा हुआ नोट है तो भी आप बैंक में जाकर उसे बदल सकते हैं❗
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3. बात सन् 1917 की हैं, जब 1₹ रुपया 13$ डाॅलर के बराबर हुआ करता था। फिर 1947 में भारत आजाद हुआ, 1₹ = 1$ कर दिया गया. फिर धीरे-धीरे भारत पर कर्ज बढ़ने लगा तो इंदिरा गांधी ने कर्ज चुकाने के लिए रूपये की कीमत कम करने का फैसला लिया उसके बाद आज तक रूपये की कीमत घटती आ रही हैं❗
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4. अगर अंग्रेजों का बस चलता तो आज भारत की करंसी पाउंड होती. लेकिन रुपए की मजबूती के कारण ऐसा संभव नही हुआ❗
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5. इस समय भारत में 400 करोड़ रूपए के नकली नोट हैं❗
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6. सुरक्षा कारणों की वजह से आपको नोट के सीरियल नंबर में I, J, O, X, Y, Z अक्षर नही मिलेंगे❗
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7. हर भारतीय नोट पर किसी न किसी चीज की फोटो छपी होती हैं जैसे- 20 रुपए के नोट पर अंडमान आइलैंड की तस्वीर है❗ वहीं, 10 रुपए के नोट पर हाथी, गैंडा और शेर छपा हुआ है, जबकि 100 रुपए के नोट पर पहाड़ और बादल की तस्वीर है❗ इसके अलावा 500 रुपए के नोट पर आजादी के आंदोलन से जुड़ी 11 मूर्ति की तस्वीर छपी हैं❗
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8. भारतीय नोट पर उसकी कीमत 15 भाषाओंमें लिखी जाती हैं❗
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9. 1₹ में 100 पैसे होगे, ये बात सन् 1957 में लागू की गई थी। पहले इसे 16 आने में बाँटा जाता था❗
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10. RBI, ने जनवरी 1938 में पहली बार 5₹ की पेपर करंसी छापी थी. जिस पर किंग जार्ज-6 का चित्र था❗ इसी साल 10,000₹ का नोट भी छापा गया था लेकिन 1978 में इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया❗
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11. आजादी के बाद पाकिस्तानने तब तक भारतीय मुद्रा का प्रयोग किया जब तक उन्होनें काम चलाने लायक नोट न छाप लिए❗
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12. भारतीय नोट किसी आम कागज के नही, बल्कि काॅटन के बने होते हैं❗ ये इतने मजबूत होते हैं कि आप नए नोट के दोनो सिरों को पकड़कर उसे फाड़ नही सकते❗
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13. एक समय ऐसा था, जब बांग्लादेश ब्लेड बनाने के लिए भारत से 5 रूपए के सिक्के मंगाया करता था. 5 रूपए के एक सिक्के से 6 ब्लेड बनते थे. 1 ब्लेड की कीमत 2 रूपए होती थी तो ब्लेड बनाने वाले को अच्छा फायदा होता था. इसे देखते हुए भारत सरकार ने सिक्का बनाने वाला मेटल ही बदल दिया❗
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14. आजादी के बाद सिक्के तांबे के बनते थे❗ उसके बाद 1964 में एल्युमिनियम के और 1988 में स्टेनलेस स्टील के बनने शुरू हुए❗
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15. भारतीय नोट पर महात्मा गांधीकी जो फोटो छपती हैं वह तब खीँची गई थी जब गांधीजी, तत्कालीन बर्मा और भारत में ब्रिटिश सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस के साथ कोलकाता स्थित वायसराय हाउस में मुलाकात करने गए थे❗ यह फोटो 1996 में नोटों पर छपनी शुरू हुई थी❗ इससे पहले महात्मा गांधी की जगह अशोक स्तंभ छापा जाता था❗
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16. भारत के 500 और 1,000 रूपये के नोट नेपालमें नही चलते❗
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17. 500₹ का पहला नोट 1987 में और 1,000₹ पहला नोट सन् 2000 में बनाया गया था❗
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18. भारत में 75, 100 और 1,000₹ के भी सिक्के छप चुके हैं❗
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19. 1₹ का नोट भारत सरकार द्वारा और 2 से 1,000₹ तक के नोट RBI द्वारा जारी किये जाते हैं❗
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20. एक समय पर भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए 0₹ का नोट 5thpillar नाम की गैर सरकारी संस्था द्वारा जारी किए गए थे❗
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21. 10₹ के सिक्के को बनाने में 6.10₹ की लागत आती हैं❗
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22. नोटो पर सीरियल नंबर इसलिए डाला जाता हैं ताकि आरबीआई(RBI) को पता चलता रहे कि इस समय मार्केट में कितनी करेंसी हैं❗
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23. रूपया भारत के अलावा इंडोनेशिया, मॉरीशस, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका की भी करंसी हैं❗
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24. According to RBI, भारत हर साल 2,000 करोड़ करंसी नोट छापता हैं❗
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25. कम्प्यूटर पर ₹ टाइप करने के लिए ‘Ctrl+Shift+$’ के बटन को एक साथ दबावें❗
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26. ₹ के इस चिन्ह को 2010 में उदय कुमार ने बनाया था। इसके लिए इनको 2.5 लाख रूपयें का इनाम भी मिला था❓
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27. क्या RBI जितना मर्जी चाहे उतनी कीमत के नोट छाप सकती हैं ❓
ऐसा नही हैं, कि RBI जितनी मर्जी चाहे उतनी कीमत के नोट छाप सकती हैं, बल्कि वह सिर्फ 10,000₹ तक के नोट छाप सकती हैं❗ अगर इससे ज्यादा कीमत के नोट छापने हैं तो उसको रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 में बदलाव करना होगा❗
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28. जब हमारे पास मशीन हैं तो हम अनगणित नोट क्यों नही छाप सकते ❓
हम कितने नोट छाप सकते हैं इसका निर्धारण मुद्रा स्फीति, जीडीपी ग्रोथ, बैंक नोट्स के रिप्लेसमेंट और रिजर्व बैंक के स्टॉक के आधार पर किया जाता है❗
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29. हर सिक्के पर सन् के नीचे एक खास निशान बना होता हैं आप उस निशान को देखकर पता लगा सकते हैं कि ये सिक्का कहाँ बना हैं❗
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*.मुंबई – हीरा [◆]
*.नोएडा – डाॅट [.]
*.हैदराबाद – सितारा [★]
*.कोलकाता – कोई निशान नहीं.
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30. जानिए, एक नोट कितने रूपयें में छपता हैं❗
*.1₹ = 1.14₹
*.10₹ = 0.66₹
*.20₹ = 0.94₹
*.50₹ = 1.63₹
*.100₹ = 1.20₹
*.500₹ = 2.45₹
*.1,000₹ = 2.67₹
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31. रूपया, डाॅलर के मुकाबले बेशक कमजोर हैं लेकिन फिर भी कुछ देश ऐसे हैं, जिनकी करंसी के आगे रूपया काफी बड़ा हैं आप कम पैसों में इन देशों में घूमने का लुत्फ उठा सकते हैं❗
*.नेपाल (1₹ = 1.60 नेपाली रुपया)
*.आइसलैंड (1₹ = 1.94 क्रोन)
*.श्रीलंका (1₹ = 2.10 श्रीलंकाई रुपया)
*.हंगरी (1₹ = 4.27 फोरिंट)
*.कंबोडिया (1₹ = 62.34 रियाल)
*.पराग्वे (1₹ = 84.73 गुआरनी)
*.इंडोनेशिया (1₹ = 222.58 इंडोनेशियन रूपया)
*.बेलारूस (1₹ = 267.97 बेलारूसी रुबल)
*.वियतनाम (1₹ = 340.39 वियतनामी डॉन्ग).
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भारतीय मुद्रा प्रणाली का संशिप्त विवरण❗
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OLD INDIAN CURRENCY SYSTEM..
Phootie Cowrie to Cowrie
Cowrie to Damri
Damri to Dhela
Dhela to Pie
Pie to to Paisa
Paisa to Rupya
256 Damri = 192 Pie = 128 Dhela = 64 Paisa (old) = 16 Anna = 1 Rupya
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Now u know how some of the indian sayings originated..
ek 'phooti cowrie' nahin doonga...
'dhele' ka kaam nahin karti hamari bahu...
chamdi jaye par 'damdi' na jaye...
'pie pie' ka hisaab rakhna...
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