Sunday, 22 March 2020

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी / COVID19


CORONA-कब तक

कोरोना नाम की उत्पत्ति कोरोनम (लैटिन) से हुई है इसका इंग्लिश अर्थ है क्राउन। कोरोना वायरस के बाहरी खोल पर ग्लाइकोप्रोटीन के काँटों जैसी संरचना के कारण यह बाहर से ताज (crown) जैसा दिखता है। इस कारण इसे यह नाम दिया गया। नोवेल-कोविड-19, नोवेल कोरोना वायरस डिसीज़ 2019 का एक्रोनिम है। इसे नोवेल (new)  कोरोना वायरस कहा जा रहा है क्योंकि यह कोरोना वायरस नया है।

कोरोना वायरस वर्ग में लक्षणों के आधार पर सामान्यतः 4 प्रकार के वायरस अल्फा, बीटा, डेल्टा, गामा पाए जाते हैं और इनमें से अधिकांश जानवरों को ही संक्रमित करते हैं। कुछ ही ऐसे वायरस हैं जो मानवों को संक्रमित कर सके हैं  नोवेल कोरोना वायरस से पूर्व दो अन्य कोरोना वायरसों का वैश्विक प्रकोप  मानवों पर देखने को मिला है। पहला  SARS- CoV (सार्स कोरोना वायरस)  सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (2002-03, चीन) के लिए और दूसरा  MERS-CoV (मर्स कोरोना वायरस) मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (2012, सऊदी अरब) के लिए उत्तरदायी था। नोवेल कोरोना वायरस की समानता SARS-CoV  से होने के कारण इसे SARS-CoV2 (severe acute respiratory syndrome corona virus 2) नाम भी दिया गया है।

SARS-CoV2 पॉजिटिव सिंगल स्ट्रेन्डेड RNA वायरस हैं जो इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप में देखने पर अपने बाहरी खोल पर कांटेदार आवरण के कारण क्राउन जैसे दिखते हैं। WHO  के अनुसार इनका प्रथम मानव संक्रमण कैसे हुआ ये अभी भी शोध का विषय है, पर एक संक्रमित मानव से स्वस्थ मानव तक ये खाँसने, छींकने पर निकलने वाली संक्रमित छोटी बूंदों से फैलता है। ये संक्रमित बूंदे सीधे श्वास के माध्यम से, या संक्रमित सतह को छूने और उसके बाद संक्रमित हाथों से आंख-नाक-मुँह छूने से फैलता है। इसका इन्क्यूबेशन पीरियड 2 दिनसे 2 सप्ताह तक है मतलब शरीर में ये बिना खुद को व्यक्त किये (बिना कोई बीमारी के लक्षण दिखाये) 2 दिन से 2 सप्ताह तक रह सकता है।

इन्क्यूबेशन पीरियड के दौरान सावधानी न बरतने पर इस वायरस का वाहक व्यक्ति संपर्क में आने वाले लोगों और सतहों को संक्रमित कर सकता है। इन लोगों और सतहों के संपर्क में आने पर एवं पर्याप्त सावधानी न बरतने पर यह वायरस तेज़ी से अन्य लोगों में भी फैल सकता है इसलिए किसी भी बहुत ज्यादा भीड़ वाली जगहों पर जाने से, सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से, अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से लोगों को मना किया जा रहा है और एक दूसरे से दूरी बरतने सलाह दी जा रही है। खासकर प्रभावित क्षेत्रों से आये लोगों को खुद को अपने घर में ही क्वारंटाइन (संगरोध; संक्रमण से बचाव हेतु दूसरों से भौतिक संपर्क में न रहने) की सलाह दी जा रही है।

क्योंकि इस वायरस का बाहरी खोल गलाईकोप्रोटीन से बना है इसलिए साबुन से धोने पर या अल्कोहल युक्त सैनीटाइज़र से धोने पर इस वायरस का बाहरी खोल ध्वस्त हो जाता है और सिर्फ जेनेटिक मैटेरियल (+ss RNA) वातावरण में एक्सपोज़ हो जाता है और वायरस खत्म हो जाता है। इसी कारण सभी को साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोने और पानी उपलब्ध न होने पर ऐल्कहाल युक्त सैनीटाइज़र हाथ पर अच्छी तरह से  लगाने की सलाह दी जा रही है। वैश्विक समुदाय इसका उपचार ढूंढने में लगा हुआ है पर जब तक उपचार नहीं मिल जाता इसके संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावकारी रास्ता  यही है। इसके अलावा कुछ सामान्य आचारगत बदलाव लाकर हम कोरोना के फैलाव को रोक सकते हैं --

•खुद को स्व-संगरोध (self quarantine) करना अर्थात दूसरों से भौतिक संपर्क से बचना।

•अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले स्थानों, शादी, धार्मिक आयोजनों, रैली, सभा, जुलूसों पर न जाना।

•संदिग्ध या संक्रमित व्यक्ति से दूरी बरतना।

•संदिग्ध लक्षण दिखने पर संदिग्ध को स्व-संगरोध (self quarantine) के लिए तथा चिकित्सकीय सहायता के लिए प्रेरित करना और इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य केंद्र को देना।

• स्वयं, अपने परिवार और अपने समुदाय को व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देने प्रेरित करना। बाहर से या किसी भी संदिग्ध या संक्रमित स्थान से आने पर साबुन से या अल्कोहलयुक्त सैनी टाइज़र से हाथ धोना, अपने मोबाइल फ़ोन को बाहर से आने पर ऐल्कहॉल युक्त सैनिटाइज़र से साफ़ करना, घर के फ़र्श और सतहों की साबुन या डिसइंफैक्टेंट से सफ़ाई करना।

•सर्दी-ज़ुकाम या बुखार के लक्षण दिखने या शंका होने पर, खाँसते और छींकते समय मुँह पर रुमाल रखना/मास्क पहनना या कोहनियों से मुँह ढँकना।

• सब्ज़ियाँ और खाद्य पदार्थों को अच्छे से पकाकर खाना।

बस इन कुछ बुनियादी उपायों पर अमल करके ही हम खुद अपने प्रति, अपने परिवार के प्रति और राष्ट्र के प्रति एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी निभाएंगे।

आगे कोरोना वायरस  के संबंध में बरती जाने वाली मुख्य सावधानियों और अधिकांश पूछे जाने वाले कुछ बिंदुओं पर चर्चा की गई है, जो WHO ने अपने आधिकारिक साइट पर ज़ारी किया हैं।

• मास्क: WHO के अनुसार मास्क तब ही ज़रूरी है जब आप किसी कोविड के संदिग्ध मरीज की पास से देखभाल कर रहे हैं या खाँस या छींक रहे हैं। मास्क का इस्तेमाल, हाथों की सफाई के साथ और ठीक तरह से किये जाने पर ही असरदार है।

-मास्क पहनने से पहले हाथ साबुन या अल्कोहलयुक्त सैनिटाइजर से साफ करें।
- अपने मुंह और नाक को मास्क से ऐसे ढंके कि, आपकी चेहरे की त्वचा और मास्क के बीच कोई खाली जगह न रहे।

-उपयोग के दौरान मास्क को हाथों से न छुयें, छू लेने पर अपने हाथों को पुनः साबुन या अल्कोहोलयुक्त सैनिटाइजर से साफ करें।

-जैसे ही मास्क खराब हो जाये इसे पीछे कान की ओर से पकड़कर खोलें, सामने से मास्क को न छुयें और एक बंद डस्टबिन में डाल दें। इसके बाद हाथ को साबुन या अल्कोहलयुक्त सैनीटाइज़र से साफ करें। सिंगल यूज मास्क को दुबारा इस्तेमाल न करें।

• कोरोना वायरस ठंडे के साथ ही गर्म और आर्द्र क्षेत्रों में भी फैल सकता है। इसलिये आप किन्ही भी क्षेत्रों में रहते हों इससे बचाव हेतु आपको सावधानी बरतने की ज़रूरत है।

• कोरोना का संक्रमण मच्छरों के काटने से नहीं फैलने के संबंध में अभी तक कोई प्रमाण प्राप्त नहीं हुए हैं।

•निमोनिया का टीका कोरोना से बचाव नहीं करता, कोरोना नया पैथोजन है और इसका इलाज अभी भी खोजा जा रहा है।

•कोरोना वायरस के प्रति सभी उम्र के लोगों को सावधानी बरतने की ज़रूरत है। ऐसा नहीं है कि, यह युवा लोगों को संक्रमित नहीं कर सकता।

•वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक्स प्रभावी नहीं होती हैं इसलिये कोरोना संक्रमण में भी यह प्रभावी नहीं होंगी।  कोरोनावायरस एक नया वायरस है जिसका इलाज अभी तक खोजा नहीं गया है।

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